बरेली। महिला दिवस पर बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने अवैध निर्माण करके बीडीए को ठेंगा दिखाने वालों को अपनी ताकत का अहसास करा दिया। भारी राजनीतिक दबाव को अनदेखा हुए उन्होंने गुलमोहर पार्क कॉलोनी में नर्सिंग होम के लिए बनाई गई पांच मंजिला अवैध इमारत को खुद तीन घंटे खड़े होकर बुलडोजर से जमींदोज करा दिया। यह इमारत डॉ. मोहित अग्रवाल और डॉ. कनुप्रिया की थी, जिन्होंने बीडीए से तीन मंजिला इमारत का आवासीय नक्शा मंजूर कराकर उसकी जगह पांच मंजिला व्यवसायिक इमारत खड़ी कर दी थी। इस इमारत में डॉक्टर दंपती ने न सेट बैक छोड़ा था न बीडीए के दूसरे नियमों का पालन किया था। बड़ी बात यह है कि बीडीए ने इस बिल्डिंग को गिराने का आदेश 2017 में ही पारित कर दिए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव में उसे दो साल बाद भी गिरा नहीं पाया था।
गुलमोहर पार्क कालोनी में एक होटल के बराबर में 942.30 वर्ग मीटर एरिया में दो साल से डॉ. मोहित और डॉ. कनुप्रिया अग्रवाल बिल्डिंग का निर्माण करा रहे थे। शुक्रवार को बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल और सचिव अंबरीश कुमार के नेतृत्व में बीडीए की टीम पुलिस फोर्स और जेसीबी लेकर यहां पहुंची। वीसी ने खुद ही नक्शे से बिल्डिंग का मिलान किया। सेट बैक के साथ सब एरिया बी बिल्डिंग में कवर्ड निकला। इसके बाद वीसी ने उस पर बुलडोजर चलाने का आदेश दे दिया। ऊपर की दोमंजिला इमारत के आरसीसी निर्माण को हैमर और कटर का इस्तेमाल कर तोड़ा गया। डॉक्टर दंपती ने आपत्ति भी जताई, लेकिन वीसी ने उनकी एक न सुनी। बीडीए ने ऊपर की दो मंजिल, सेट बैक और कवर एरिया समेत नक्शे के विपरीत कराया गया सारा निर्माण ध्वस्त कर दिया। तीन घंटे तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चली। बीडीए की टीम में एक्सईएन मोहनलाल, जहीरुद्दीन, सीटीपी आशीष शिवपुरी, एसई आरके जायसवाल, एई पीके गुप्ता समेत अन्य स्टाफ और पुलिस फोर्स शामिल था।
सील होने के बाद भी बनती रही बिल्डिंग
डॉ. दंपती ने यहां बीडीए से अलग-अलग दो आवासीय मानचित्र स्वीकृत कराए थे लेकिन दोनों भूखंडों को मिलाकर स्वीकृत नक्शे के विरुद्ध यहां एक ही नर्सिंग होम का निर्माण कराया जा रहा था। बीडीए के एई और जेई ने 11 अक्टूबर 2010 और 19 जनवरी 2018 को इसे सील भी किया था। मगर इसके बावजूद निर्माण बराबर चलता रहा। बीडीए की ओर से डा. दंपती को नोटिस भी दिए गए कि अपना अवैध निर्माण खुद तोड़ लें, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। पांच मार्च 2019 को बिल्डिंग एक बार फिर सील की गई, लेकिन निर्माण फिर भी नहीं रुका।
बिल्डंग निर्माण में प्राधिकरण के कोई भी नियम फॉलो नहीं किए गए थे। न सेट बैक छोड़ा गया न ही कवर। नक्शे की पूरी जगह बिल्डिंग में कवर कर दी गई। बिल्डिंग निर्माण कराने वाले बड़े लोग हैं। मगर नियमों के पालन में बड़े-छोटे का भेदभाव न करके कार्रवाई की गई है। आगे भी नियमविरुद्ध होने वाले अवैध निर्माण पर कार्रवाई बिना किसी भेदभाव की जाएगी। - दिव्या मित्तल, उपाध्यक्ष बीडीए
केवल मेरा नर्सिंग होम इस शहर में अवैध नहीं बना है। शहर में तमाम नर्सिंग होम अवैध हैं। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर मेरी बिल्डिंग बीडीए के नियमविरुद्ध बताकर तोड़ी है तो मैं बीडीए अफसरों से उम्मीद करूंगा कि शहर के जो दूसरे अवैध नर्सिंग होम हैं, उन्हें भी जेसीबी ले जाकर तोड़ें। -डॉ. मोहित अग्रवाल, चिकित्सक