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एमएलसी ने पूछा कितने भूतघर और ऊपर से नीचे तक चली आई चिट्ठी

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बरेली। अफसरों को इन दिनों शासन से आई एक चिट्ठी परेशान कर रही है जिसमें उन्हें मंडल में भूतघरों की संख्या बताने को कहा गया है। दिक्कत की बात एक तो यह है कि शासन की ऐसी कोई योजना अफसरों की जानकारी में नहीं है जिसमें भूतघरों का जिक्र हो, दूसरी मुसीबत यह है कि शासन की यह चिट्ठी मन में उठ रहे इस सवाल के साथ वापस भी नहीं लौटा सकते। लिहाजा शासन से चली यह चिट्ठी कमिश्नर और मंडल भर के जिलाधिकारियों की कलम से फॉरवर्ड होते हुए बरेली में विकास प्राधिकरण और दूसरे जिलों में नगर पालिका के अफसरों की टेबल तक पहुंचकर ठहर गई है। कई दिनों से इस पर मंथन चल रहा है, लेकिन यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि शासन को इसका क्या जवाब भेजा जाए।
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शासन और प्रशासन के अफसरों के सामने भूतघरों की संख्या पूछने जैसा यक्ष प्रश्न दरअसल बरेली-मुरादाबाद सीट के एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने खड़ा किया है। पिछले दिनों उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए विधान परिषद में प्रश्न पूछा था- मुख्यमंत्री जी क्या बताएंगे कि बरेली मंडल में कितने भूतघर बने हुए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि पिछले दो सालों के दौरान सरकार ने कितने और भूतघरों का निर्माण कराया है। शासन के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से होता हुआ यह आदेश कमिश्नर के पास पहुंच गया कि बरेली मंडल में बने भूतघरों की संख्या बताई जाए। भूतघर क्या है, यह शासन में बैठे अफसरों ने समझने की जहमत नहीं उठाई और ऐसे ही यह आदेश कमिश्नर की टेबल से होते हुए बरेली मंडल के सभी जिलाधिकारियों के पास भी पहुंच गया। अपर आयुक्त प्रशासन रहे श्रीकृष्ण त्रिपाठी ने 17 दिसंबर को वांछित सूचनाएं देने के लिए सभी जिलाधिकारियों और बीडीए उपाध्यक्ष को पत्र जारी कर दिया। अब नीचे के अफसर इस पत्र को लेकर चकराए हुए हैं। शासन को तो जवाब नहीं गया है, लेकिन अफसरों की बीच यह चर्चा जरूर है कि सरकारी लिखापढ़ी में भूत जैसा अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला शब्द आखिर कैसे प्रयोग किया गया है।

न अपर आयुक्त को पता न एडीएम सिटी को
सभी डीएम और बीडीए को भूतघरों की संख्या बताने के लिए 17 दिसंबर को आदेश जारी करने वाले प्रभारी अपर आयुक्त प्रशासन श्रीकृष्ण त्रिपाठी को भी यह जानकारी नहीं है कि भूतघर आखिर क्या बला है। उन्होंने बताया कि शासन का पत्र आया था तो उन्होंने इसे आगे बढ़ा दिया। अब अगर नीचे के अफसर इस बारे में कुछ सवाल करेंगे तो शासन से ही इसकी जानकारी मांग ली जाएगी। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी ने भी भूतघर के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया। बोले- हो सकता है कि शवदाह गृहों के बारे में कोई सूचना मांगी गई हो। बोले, एक बार फिर चिट्ठी देखकर यह पता कराएंगे कि शासन के निर्देश पर आखिर कौन सी सूचना जुटाई जानी है।
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.. तो सपा की खिल्ली उड़ाने के लिए ईजाद हुआ ‘भूतघर’
भूतघरों की संख्या जानने के लिए विधान परिषद में सवाल रखने वाले एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त से अमर उजाला ने बात की तो पहले तो वह इसको परिभाषित करने में थोड़ा हिचकिचाए, फिर बोले कि सपा शासन के दौरान समाजवादी आवास योजना में शहरी गरीबों के लिए जो घर बने थे, उन्हें आवंटित नहीं किया गया था। इन आवासों से जब खिड़की-दरवाजे चोरी होने लगे तो वे खंडहर दिखाई देने लगे। एमएलसी से जब पूछा कि वह क्या लोहिया आवासों की बात कर रहे हैं तो उन्होेंने इसे नकारते हुए कहा कि नहीं ये समाजवादी आवास ही हैं। यह पूछे जाने पर उन्होंने इन आवासों को भूतघर क्यों कहा तो वह फिर थोड़ा हिचकिचाए। फिर बोले.. शायद किसी ने इन आवासों को भूतघर या घोस्ट हाउस ही बोला था। उन्हें लगा कि शायद यह जनहित का मुद्दा है, इसीलिए सवाल उठा दिया।
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