बरेली। सुभाषनगर पटाखा बाजार के दुकानदार परमीशन न मिलने से दिन में नाराज होकर कलक्ट्रेट पहुंचे लेकिन शाम को सिटी मजिस्ट्रेट के दफ्तर से लाइसेंस मिल जाने पर मुस्कुराते हुए लौटे। दुकानदार पहले इस बात को लेकर नाराज थे कि हर साल सुभाषनगर में पटाखे की 50 से ज्यादा दुकानें लगती हैं लेकिन इस बार केवल 15 लोगों को ही परमिट देने की बात प्रशासन कर रहा है। दुकानदारों ने बताया कि बाद में सभी लोगों को दुकानों के परमिट दे दिए गए हैं। सुभाषनगर में पटाखा बाजार को लेकर असमंजस की स्थिति थी। दुकानदारों को सोमवार दोपहर तक लाइसेंस ही नहीं दिए गए थे। इससे नाराज होकर तमाम दुकानदार कलक्ट्रेट पहुंचे और वहां अधिकारियों से मिलकर कहा कि हर साल 50 दुकानें लगती है। उसी हिसाब से दुकानदारों ने बिक्री के लिए आतिशबाजी खरीदी है लेकिन केवल पंद्रह को ही परमिट मिलने से बाकी दुकानदारों का लाखों का माल फंस जाएगा, जबकि परमिट के लिए फायर, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने रिपोर्ट लगा दी है, केवल सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से लाइसेंस जारी होना बाकी है। इससे परेशान दुकानदार दिनभर कलक्ट्रेट में परेशान घूमते रहे। सुबह से उर्स में ड्यूटी के बाद शाम को सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला दफ्तर में बैठे तो दुकानदारों ने उन्हें अपनी समस्या बताई। दुकानदारों ने बताया कि शाम को सभी को दुकानों के परमिट जारी कर दिए गए हैं।
11 पटाखा बाजारों में निर्धारित की गईं दुकानेें
- मनोहर भूषण इंटर कॉलेज - 40 दुकानें
- राजकीय इंटर कॉलेज - 25 दुकानें
-रामलीला मैदान मॉडल टाउन- 20 दुकानें
-तुलसीनगर मैदान - 40 दुकानें
-चौधरी तालाब रामलीला स्थल - 40 दुकानें
-सुभाषनगर रेलवे स्कूल ग्राउंड - 40 दुकानें
-बीआई बाजार तिकोनिया कैंट - 15 दुकानें
-सदर बाजार में चर्च के पास - 05 दुकानें
-रामलीला मैदान हार्टमैन कालेज - 25 दुकानें
-सीबीगंज लोहिया विहार पार्क में - 25 दुकानें
एसीएम द्वितीय को आदेश दिए थे कि जिन दुकानदारों के फायर क्लीयरेंस हैं, उन्हें परमिट जारी कर दिया गया है। यहां खासतौर से सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा। -अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
सुरक्षा से खिलवाड़ भी
दिवाली पर पटाखा बाजार भले लग गए हाें लेकिन अभी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सुभाषनगर में भी पटाखा बाजार लग गया है लेकिन सोमवार शाम तक वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौजूद नहीं थी। दुकानदारों के पास भी अग्निशमन यंत्र नहीं थे। कुछ दुकानदारों के पास आग बुझाने के नाम पर बालू भरी बाल्टियां जरूर देखी गईं। कमोवेेश यही हाल दूसरे पटाखा बाजारों का भी है।