पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के करीबी सत्यवीर सिंह ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के अवैध कब्जे की शिकायत की है। कहा है कि इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के चांसलर ने खुद कब्जे की बात स्वीकार की है लेकिन नगर आयुक्त निगम की जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटवा रहे हैं। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले में नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को जांच के निर्देश दिए हैं।
सत्यवीर सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि रजऊ परसपुर में नगर निगम की जमीन है, जिस पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगा है। निगम की भूमि के बराबर में इन्वर्टिस विश्वविद्यालय है। इस संस्थान ने लगभग सात हजार गज सरकारी जमीन पर पिछले 12 साल से कब्जा कर उस पर बिल्डिंग बना रखी है। तहसीलदार फरीदपुर की टीम ने जांच भी कर रखी है और इन्वर्टिस के कुलपति ने खुद अवैध कब्जे को माना है लेकिन नगर आयुक्त इस कब्जे को नहीं हटवा रहे हैं। मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि डीएम बरेली को तत्काल अवैध कब्जा हटाने और सरकारी भूमि को अपने कब्जे में लेने का निर्देश जारी करें। इस शिकायत को मुख्यमंत्री कार्यालय से 21 मई को डीएम को भेजा गया। डीएम ने 22 मई को इसकी जांच के लिए नगर आयुक्त को निर्देश जारी कर दिए। फिलहाल यह मामला कोई कार्रवाई न होने से पोर्टल पर लंबित दर्ज है।
डॉ. तोमर को इलाज की जरूरत : गौतम
बोले- केंद्र से मिले 13 करोड़ रुपये कर दिए खुर्द-बुर्द
मेयर उमेश गौतम ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर को घेरा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इलाज की जरूरत है। आज वह नगर निगम की जमीन पर इन्वर्टिस का कब्जा बता रहे हैं, कल कहेंगे कि निगम उनकी जमीन पर बना है। सबको पता है कि एक बार इन्वर्टिस की दीवार तोड़ी गई थी और सारा मामला क्लियर हो चुका है। इन्वर्टिस का अब कोई कब्जा नहीं है। प्लांट के मुद्दे पर कहा कि डॉ. तोमर ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्लांट लगाने को मिले 13 करोड़ रुपये खुर्द-बुर्द कर दिए गए। ऑडिट ने इस पर आपत्ति जताई है, पूरी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही हैै। इस सब के बारे में जब डॉ. तोमर से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।