सिंचाई विभाग की रुहेलखंड नहर डिवीजन को तो अपनी जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को रोकने की फुर्सत नहीं मिली, लेकिन अमर उजाला की खबर पर बीडीए जरूर हरकत में आ गया। बीडीए के उपसचिव की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम ने रविवार को नार्थ सिटी और नार्थ सिटी एक्सटेंशन पहुंचकर दोनों अवैध निर्माण सील कर दिए।
अमर उजाला ने 11 फरवरी के अंक में ‘कब्जा हो रही नहर पर कोई झांका तक नहीं.. फिर भी हट गए कब्जे’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर नार्थ सिटी और नार्थ सिटी एक्सटेंशन कालोनियों में नहर की जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने और लंबे समय से उस पर निर्माण कराने का समाचार प्रकाशित किया था। सिंचाई विभाग की रुहेलखंड नहर डिवीजन जिस पर इस जमीन पर अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी है, उसके इंजीनियरों ने तो अपने विभाग की जमीन बचाने की जहमत नहीं उठायी, लेकिन बीडीए के सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने एक्शन में आकर उपसचिव अनिल मिश्रा के नेतृत्व में जेई लक्ष्मण सिंह रावत, प्रताप सिंह यादव और लालता प्रसाद को नार्थ सिटी और नार्थ सिटी एक्सटेंशन में मौके पर जाकर अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपसचिव ने मौके पर पहुंचे तो नहर की जमीन पर अवैध निर्माण कराने वाले प्रापर्टी कारोबारी एक बड़े एरिया में करोड़ों की कीमत की नहर की जमीन पर दो मंजिला अवैध निर्माण का बीडीए से स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं कर पाए। इस पर बीडीए की टीम ने दोनों अवैध निर्माण सील कर दिए। नहर की जमीन पर आगे अवैध निर्माण न हो, इसके लिए इज्जतनगर थाना प्रभारी को बीडीए की ओर से पत्र भी भेजा जा रहा है। बीडीए के अफसरों का कहना है कि सील होने के बाद अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस की है।
अब कंपाउंडिंग कराने की जुगाड़ में प्रॉपर्टी डीलर
नार्थ सिटी और नार्थ सिटी एक्स्टेंशन में कब्जाई गई नहर की जमीन पर 80 फीसदी से ज्यादा अवैध निर्माण हो चुका है। नार्थ सिटी कालोनी में ही रहने वाले लोगों की मानें तो नहर की जमीन पर अनधिकृत कब्जा कर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए मकान और दुकानों का निर्माण कराने वाले प्रापर्टी कारोबारी निर्माण सील होने के बाद अब उसकी कंपाउंडिंग कराने की तैयारी में हैं। इसके लिए कारोबारियों ने एक आर्किटैक्ट से संपर्क साधा है। हालांकि नियमानुसार नहर की जमीन पर न तो प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत हो सकता है, न उसकी कंापउंडिंग हो सकती है क्योंकि इसके लिए सबसे पहले तो एयरफोर्स की अनुमति लेनी होगी।
नहर की जमीन पर अवैध निर्माण चेक करने के लिए बीडीए की टीम भेजी गई थी। मौके पर हो रहा निर्माण अवैध पाया गया क्योंकि उसका नक्शा बीडीए से स्वीकृत नहीं था। दोनों निर्माण सील कर दिए गए हैं। - सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव, बीडीए