भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के पशुओं में ब्रुसेल्लोसिस बैक्टीरिया से संक्रमण होने की बात हवा हवाई निकली। निदेशक डॉ. आरके सिंह ने स्पष्ट कहा कि संस्थान की डेयरी के पशु इस बैक्टीरिया से संक्रमित नहीं है। सोशल मीडिया पर जानबूझकर संस्थान की छवि पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह जिनके सोशल मीडिया पेज के हवाले पूरा मामला उछाला गया उन्होंने शुक्रवार सुबह सारे तथ्यों को झूटा करार दिया। वह लिखते हैं कि जिस मामले को लिखा गया उसमें वो तथ्य ही नहीं जो उनके ब्लॉक पर लिखे गए।
डॉ. भोजराज के सोशल मीडिया पेज के हवाले से लिखा गया था कि आईवीआरआई संक्रमित दूध बेच रहा है तो आम जनता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कहा गया कि संस्थान की डेयरी में एक हजार पशु ब्रुसेल्लोसिस बैक्टीरिया से संक्रमित हैं। डेयरी के जानवरों का गर्भपात हो रहा है। इन दुधारू पशुओं के दूध को भी संक्रमित बताया गया था। डॉ. भोजराज सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि ब्रुसेल्लॉसिस प्रोग्राम के तहत गांव के दुधारू पशुओं का वर्ष में दो बार परीक्षण होना चाहिए न कि दो पश्ुाओं का। संस्थान की डेयरी में लगभग एक हजार पशु हैं न कि एक हजार संक्रमित, डेरी में गर्भपात और सम से पूर्व प्रसव का कुल आंकड़ा द स फीसदी है न कि दस फीसदी बढ़ा। अगर दस फीसदी का गर्भपात होता है तो एक सामान्य बात है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो मामला उछाला गया वो उसमें तथ्यों को बढ़ा चढ़ाकर लिखा गया। वहीं निदेशक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि संस्थान के दुधारू पशुओं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उनका दूध भी सुरक्षित है। जो तथ्य लिखे गए वो सब झूठ हैं।