बरेली। पिछले साल जानलेवा बन चुके फेल्सीफेरम मलेरिया का आतंक बरपने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा फिर आधी-अधूरी तैयारियों के साथ जंग की तैयारी कर रहा है। लैब टेकभनीशियन न होने से जांच में देरी से फेल्सीफेरम का आतंक फिर से फैलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय को पत्र लिखकर 14 एलटी के रिक्त पदों को जल्द भरे जाने का दावा किया है।
सनद रहे कि पिछले वर्ष बरेली में करीब 17 हजार से अधिक फेल्सीफेरम मलेरिया से पीड़ित मिले थे। समय पर इलाज न मिलने और बचाव के इंतजाम न होने से करीब सौ से अधिक पीड़ितों को जान गंवानी पड़ी थी। इसके अलावा करीब 37 हजार मामले मलेरिया के मिले थे। महामारी बन रहे मलेरिया को काबू करने के लिए मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया था और स्वास्थ्य मंत्री को बरेली भेजकर स्थिति नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे। स्वास्थ्य मंत्री का कड़ा रुख देखने के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और तेजी से मलेरिया पर काबू पाने के लिए अलर्ट जारी किया लेकिन तब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके थे। सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष भी लैब टेकभनीशियन की कमी होने से फेल्सीफेरम मलेरिया से पीड़ितों की जांच में देरी हुई। तब तक मच्छर इसे संक्रामक बना चुके थे। वहीं, पिछली बार इस समस्या से जूझने के बाद अबकी बार भी स्वास्थ्य महकमे ने लैब टेकभनीशियन के रिक्त पद नहीं भरे हैं। वहीं, मच्छरों का पनपना, डंक मारने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
डीडीटी की खेप पहुंची विभाग
मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग को अबकी बार सरकारी मुहर लगे डीडीटी के पैकेट जिला मलेरिया विभाग को उपलब्ध कराए गए हैं। सनद रहे कि पिछली बार नकली डीडीटी के छिड़काव का आरोप लगा था। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पिछली बार भी असली पैकेट से ही छिड़काव हुआ था लेकिन अबकी बार विश्वसनीयता के लिए सीलबंद मुहर लगे पैकेट मिले हैं।
मई से शुरू होगी मुहिम
जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह के मुताबिक पिछले दिनों एडी हेल्थ की मंडलीय मीटिंग में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए निर्देश दिए हैं। पिछले वर्ष अति संवेदनशील रहे ब्लॉकों को चिह्नित कर वहां प्राथमिक स्तर पर छिड़काव, साफ-सफाई कराने समेत जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। बताया कि रैपिड एक्शन टीम को भी कोई केस मिलने पर तत्काल स्थिति नियंत्रित करने को भेजा जाएगा।