बरेली। गर्भ में मृत भ्रूण को नसबंदी कराने पर ही निकालने की जिद पर अड़े महिला अस्पताल के स्टाफ ने इस मामले में फजीहत होने के बाद शुक्रवार को गर्भ से मृत भ्रूण को निकाला। सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि महिला में हीमोग्लोबिन की बेहद कमी थी। इसलिए उसे बगैर तकलीफ पहुंचाए मृत भ्रूण निकालना कठिन था। इसलिए ब्लड चढ़ाने के बाद उसकी स्थिति सामान्य होने पर भ्रूण को निकाला गया है।
बुधवार को भोजीपुरा के भीकमपुर निवासी शबाना को महिला अस्पताल रेफर किया गया था। उसके गर्भ में दो दिन से करीब तीन माह का मृत भ्रूण था। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने दंपति के सामने दोनों में किसी एक को नसबंदी कराने को कहा। दोनों राजी नहीं हुए तो उन्होंने गर्भ से मृत भ्रूण नसबंदी के बाद ही निकालने की शर्त रख दी। पति ने सीएमएस से गुहार लगाई तो उन्होंने भ्रूण को निकालकर सफाई कराने के निर्देश दिए। जांच में हीमोग्लोबिन कम होने से दो दिन और यानी चार दिन मृत भ्रूण गर्भ में पड़ा रहा। सीएमएस ने किसी तरह का सेप्टिक नहीं होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि महिला के गर्भ धारण करने की क्षमता बेहद कम है। अगर वह फिर गर्भवर्ती हुई तो जान पर बन सकती है। इसलिए दंपति को नसबंदी कराने को कहा था।