बरेली। होली का त्योहार इस बार जातकों के लिए विशेष रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाने वाली होली राहु की उग्रता से राहत दिलाएगी। साथ ही ग्रहों की विशेष स्थिति बनने से होली के विशेष होने की संभावना जताई है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि होली पर सूर्य मीन राशि में रहेगा जो बृहस्पति की राशि है। चंद्रमा सिंह राशि में, बुध ग्रह कुंभ में यानी शनि की राशि में रहेगा। बृहस्पति वृश्चिक राशि में रहेंगे। शुक्र मकर राशि में और शनि धनु राशि में रहेंगे। इनके अलावा राहु, केतु और मिथुन धनु राशि में रहेंगे। होली पर ग्रहों का यह योग संबंधित राशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। होली बुधवार की होने से व्यापारी वर्ग की आय में वृद्धि होने के भी योग बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को इन आठों ग्रहों की नकारात्मक शक्तियों के कमजोर होने की खुशी में अबीर-गुलाल के जरिए रंगों से खुशियों का इजहार किया जाता है।
क्यों अशुभ होता है होलाष्टक
14 मार्च से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार होलाष्टक के प्रथम दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है, इसलिए आठ दिन मानव मस्तिष्क विकार, शंका और दुविधा से घिरा रहता है। इससे शुरू हुए कार्य बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
शुभ मुहूर्त
होलिका (20 मार्च)
दहन मुहूर्त - रात 8.57 से 12.28 बजे तक
भद्रा पूंछ - शाम 5.13 से 6.24 बजे तक
भद्रा मुख - शाम 6.24 से 8.07 बजे तक
रंगवाली होली (21 मार्च)
पूर्णिमा तिथि आरंभ - सुबह 10.44 बजे तक
पूर्णिमा तिथि समाप्त - शाम 7.12 बजे तक
महीने भर मांगलिक कार्यों पर लगा ‘खरमास’
बरेली। 15 मार्च यानी शुक्रवार को सूर्य का मीन राशि में प्रवेश होने के साथ ही खरमास लग जाएगा। यह 14 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा। इस बीच मांगलिक कार्यों पर अंकुश रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, 14 अप्रैल की दोपहर 2.25 बजे सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्यों का अनुष्ठान शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि खरमास में शादी, गोद भराई, सगाई, बहू का गृह प्रवेश, मुंडन, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ समेत अन्य मांगलिक और शुभ कार्य का अनुष्ठान वर्जित हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान सूर्य गुरु की राशि में रहता है जिस वजह से गुरु का प्रभाव कम हो जाता है और मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रभावशाली होना आवश्यक होता है। गुरु ही वैवाहिक जीवन का सुख और संतानदायी माना जाता है। मान्यता है कि खरमास के दौरान मांगलिक कार्य करने से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खरमास में भगवत गीता का पाठ करने, भगवान शंकर और श्री विष्णु की आराधना कष्टों से मुक्ति दिलाती है। हवन के साथ दान से भी पुण्य मिलता है।