बरेली। गलत सिग्नल पर सियालदह एक्सप्रेस चलाने के मामले को लेकर मुरादाबाद मंडल में हड़कंप मच गया है। दिन भर सेफ्टी से जुड़े अधिकारी और मंडलीय अधिकारी जानकारी लेते रहे, लेकिन मामला कहीं दर्ज न होने के कारण हकीकत नहीं पता लग सकी। सूत्रों का कहना है कि आपरेटिंग अनुभाग के अधिकारियों ने ड्राइवर और गार्ड के भी बयान लिए हैं। फिलहाल मंडलीय अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं।
यार्ड से इंजन के लिए दिए गए सिग्नल पर सियालदह एक्सप्रेस को चलाने से मुरादाबाद मंडल में हड़कंप मच गया है। मंगलवार को सेफ्टी अनुभाग के अधिकारी ने जंक्शन पर स्थानीय अधिकारियों से बात करके हकीकत जाननी चाही, लेकिन मामला कहीं दर्ज न होने के कारण कुछ ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी। चूंकि मामला केवल बीस मीटर का था, इसलिए रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया है। उधर, आपरेटिंग विभाग के अधिकारियों ने भी ड्राइवर और गार्ड से पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी अपनी गलती नहीं मानी।
अब पावर केबिन और ड्राइवर एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। रेल जानकारों का कहना है कि चार जनवरी को मिलक स्टेशन के पास मालगाड़ी का इंजन डिरेल नहीं होता तो मंडलीय अधिकारियों को घटना का पता भी न चलता। वहां पर भी स्टार्टर सिग्नल पर प्वाइंट न बने होने के कारण इंजन डिरेल हो गया था। गौरतलब है कि सोमवार को आउटर सिग्नल पर खड़ी सियालदह एक्सप्रेस यार्ड में खड़े इंजन को चलाने के लिए दिए सिग्नल पर केवल बीस मीटर आगे बढ़ गई थी। ऐन मौके पर स्टेशन मास्टर को पता चलने पर उन्होंने ट्रेन को रुकवाया था। इसके बाद तुरंत ही यार्ड से इंजन उसी लाइन पर आ गया था।