ब्लैक शीप की बीमारी पर शोध
लटका, नहीं मिले ब्लड सैंपल
गंगोत्री गई आईवीआरआई की टीम नाकामयाब लौटी
- एनजीटी के आदेश के बाद शोधकर्ताओं को नवंबर में ही तैयार करनी है रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली दुर्लभ भड़ल यानी ब्लैक शीप के बीमार होने पर शोध करने गई आईवीआरआई की टीम बैरंग लौट आई है। शोध टीम को भड़ल के खून और मांस के नमूने नहीं मिल सके। टीम के सदस्यों का कहना है कि भड़ल इतनी फुर्तीली थी कि उसके पास तक कोई पहुंच ही नहीं सका। अगर उसे बेहोशी का इंजेक्शन देते तो पहाड़ी से गिरकर उसकी मौत होेने का भी अंदेशा था। इसलिए टीम सैंपल लिए बगैर ही आ गई। टीम के सदस्यों का यह भी दावा है कि देखने में भड़ल स्वस्थ लग रही थी।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद आईवीआरआई को भड़ल की बीमारी पर शोध करना था। फॉरेस्ट के अफसरों ने यह रिपोर्ट दी थी कि उत्तराखंड में करीब पांच हजार फुट की ऊंचाई पर गंगोत्री में रहने वाली भड़ल के आंखों से खून निकल रहा है, जिसके बाद इस दुर्लभ जीव के किसी भयंकर बीमारी की चपेट में आने की आशंका जताई जाने लगी। इसके बाद आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने यहां से वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. एके शर्मा के नेतृत्व में एक शोध टीम को गंगोत्री भेजा था। वहां यह टीम उत्तराखंड फॉरेस्ट अफसरों के साथ में भड़ल के खून और मांस के सैंपल लेने के लिए गई थी, लेकिन टीम अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकी। हाल में गंगोत्री से लौटकर आई टीम के सदस्य डॉ. एके सिंह ने बताया कि भड़ल के पास पहुंचना और उसे पकड़ना काफी चुनौती पूर्ण था। चूंकि वह पहाड़ पर तेजी से सीधी चलती है, इसलिए अगर उसे ट्रंकुलाइज करने की कोशिश करते तो उसके ऊंचाई से नीचे गिरकर मरने की आशंका थी। उनका कहना था कि उन्होंने भड़ल को दूर से देखा था तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वह किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित है। इधर, टीम के सैंपल न ला पाने से भड़ल की बीमारी का शोध भी लटक गया है।