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स्वच्छ भारत मिशन में अटक गई रकम

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टुल्ला- स्वच्छ भारत मिशन में गड़बड़ी
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मेन...

70 हजार लोगों को आंख
मूूंदकर दे दिए 45 करोड़
शौचालय बनाने को पहली किश्त के रूप में दिए थे छह हजार रुपये
- अब ग्राम पंचायतें ऐसे लोगों को भेज रहीं नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। जिले को दो अक्टूबर तक ओडीएफ घोषित करने के दबाव में प्रशासन ने करीब 70 हजार लोगों को 45 करोड़ की रकम आंख मूंदकर जारी कर दी। अब बड़ी संख्या में लाभार्थी शौचालय बनाने के बजाय यह रकम डकार कर बैठ गए हैं। अब डीपीआरओ के आदेश पर ग्राम पंचायतों ने ऐसे करीब पांच हजार लाभार्थियों को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो मेहनत मजदूरी करने के लिए बाहर चले गए हैं। बारिश की वजह से भी लोग शौचालयों के निर्माण कराने से बच रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सर्वे में जिलेभर में 2.55 लाख ऐसे घरों को चिह्नित किया गया था, जिनके यहां शौचालयों के निर्माण ही नहीं हुए हैं। दो अक्टूबर 2014 में इन सभी परिवारों के लिए शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया, जिसे इस साल दो अक्टूबर तक पूरा करके जिले को ओडीएफ घोषित होना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2018-19 में स्वच्छ भारत मिशन पर पूरा फोकस रखा। लक्ष्य को पाने के दबाव में प्रशासन ने करीब 72 हजार लाभार्थियों के खाते में शौचालय बनाने की पहली किस्त के रूप में छह हजार रुपये की रकम जारी करते हुए 45 करोड़ खपा दिए। यह पूरी रकम ग्राम पंचायतों को न देकर सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर हुई।
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अब दिक्कत यह आ रही है कि पहली किस्त लेने वाले लाभार्थियों ने इस रकम को टॉयलेट बनाने के बजाय अन्य में खर्च कर दिया। चूंकि यह धनराशि सीधे खाते में पहुंची, इसलिए लाभार्थी को उसे बेरोकटोक निकालने और खर्च करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लग सका। डीपीआरओ विनय कुमार सिंह का कहना है कि अब तक ऐसे करीब पांच हजार लोगों को चिह्नित किया जा चुका है।

किस्त की दूसरी रकम
देने पर लगी पाबंदी
लाभार्थियों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए 12 हजार की रकम छह-छह हजार रुपये की दो किस्तों में दी जाती है। नियम यही है कि छह हजार खर्च होने का सत्यापन होने के बाद पंचायत सचिव इसकी रिपोर्ट देता है, तब दूसरी किस्त जारी होती है। अब डीपीआरओ ने टॉयलेट बनवाने के लिए लाभार्थियों को दूसरी किस्त देने से मना कर दिया है।
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वर्जन
बड़ी संख्या में लाभार्थी टायलेट नहीं बना रहे हैं, जबकि उन्हें रकम दी जा चुकी है। ग्राम पंचायतों की ओर से इन्हें नोटिस जारी करने की कार्रवाई चल रही है।
-विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ
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