फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सत्यवती सिन्हा का निधन

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली/ रुड़की।
विज्ञापन

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. सत्यवती सिन्हा रुड़की में शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। मुखाग्नि उनके पुत्र विभूति सिन्हा ने दी। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और कुछ समय से रुड़की में ही चंद्रपुरी स्थित अपनी बेेटी किरण कौशिक के आवास पर रह रही थीं। वहीं शुक्रवार को अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे उनका निधन हुआ।
यादों को ताजा करते हुए उनकी बेटी किरण कौशिक ने बताया कि मां का जन्म आंवला के गांव पथरा में 23 जून 1926 को हुआ था। मेरे पिता डॉ. जगदीश नारायण सिन्हा भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आठ मार्च 1942 को उनकी शादी हुई थी। शादी के तुरंत बाद महज 16 साल की उम्र में उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने पति के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के चलते उन्हें मेरठ छोड़ बरेली भागना पड़ा था। इस दौरान वह अपने पिता यानी मेरे नाना जय नारायण वर्मा के भूड़ स्थित आवास पर आकर काफी दिन रहीं और यहीं से पकड़ी भी गईं। तब उन्हें बरेली कोतवाली की जेल में कई दिनों बंद रखा गया था। किरन ने बताया कि उनके कुछ रिलेटिव पत्थरवाली हवेली में आज भी रहते हैं, जहां उनका आना-जाना है। बताया कि यूपी से मेरा गहरा नाता है। मेरे पिता जगदीश नारायण सिन्हा यूपी से तीन बार विधायक और एक बार शिक्षामंत्री भी रहे चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


भूड़ मोहल्ले में रहते थे नाना-नानी
बरेली। डॉ. सत्यवती सिन्हा के पिता जय नारायण वर्मा और माता बृजरानी वर्मा कुछ समय बाद ही आंवला से आकर बरेली के भूड़ मोहल्ले में आकर बस गए थे। जय नारायण वर्मा पालीटेक्निक करके सिंचाई विभाग में ओवरसीयर (जेई) बन गए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें