बरेली। स्कूलों में मस्ती की पाठशाला शुरू हो गई है। खेल-खेल में बच्चों को तमाम रचनात्मक कलाकृतियां बनाना, डांस, म्युजिक, पर्सनॉलिटी डेवलपमेंट, आर्ट एंड क्राफ्ट आदि की ट्रेनिंग दी जा रही है। बच्चे भी सीखने को आतुर हैं, लेकिन खेलों की स्थिति यहां भी बदहाल है। सिखाने के बजाय समरकैंप बच्चों को व्यस्त रखने का साधन नजर आ रहा है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को माधवराव सिंधिया में चल रहे समर कैंप का लाइव किया तो खेलों के प्रशिक्षण में खानापूर्ति दिखी। बाकी सब तो ठीक था लेकिन कोच की कमी रही।
एक कोच और दो टीचर सिखा रहे हैंडबाल
हैंडबाल सीखने के लिए 100 बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इतने बच्चों की सहभागिता के चलते प्रशिक्षण के बजाय बच्चे शोरगुल मचाते दिखे। छह दिन की ट्रेनिंग क्लास होने के चलते कोच बच्चों को बाल थ्रो और शूटिंग सिखाने में कोई खास रुचि लेते नहीं दिखे। जबकि नियमानुसार टीमें बनाकर बच्चों को खेल की प्रैक्टिस करानी चाहिए।
बास्केटबाल में भी सौ से अधिक ‘खिलाड़ी’
हैंडबाल के पास ही 100 विद्यार्थियों को एक साथ बास्केटबाल की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस खेल में 30 छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया है। बास्केटबाल की प्रॉपर किट या यूनिफार्म न होने से छात्राओं को स्कूल ड्रेस में ही प्रैक्टिस कराई जा रही है। इस वजह से वार्मअप, रनिंग और बाल थ्रो के दौरान बार-बार छात्राओं का दुपट्टा गिर रहा था। असहज छात्राएं खेल सीखने के बजाय कपड़ों को संभालती दिखीं। यहां एक महिला और एक पुरुष कोच सौ बच्चे प्रशिक्षित कर रहे हैं।
ताइक्वांडो में आत्मरक्षा के सीख रहे गुर
आउटडोर गेम्स में बच्चे सिर्फ टाइमपास करते दिखे लेकिन ताइक्वांडो में बच्चे आत्मरक्षा के गुर सीखते दिखाई दिए। ताइक्वांडो के ब्लैक बेल्ट चैंपियन कोच सचिन भाटिया प्रशिक्षित कर रहे हैं। यहां दो पालियोें में 40-40 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। गर्मी के चलते बड़े से टेंट में कक्षा 3-8 तक के बच्चे ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रहे हैं। कोच के साथ एक शिक्षिका भी बच्चों की मदद करती दिखीं।
सलाद को सजाने का बच्चे सीख रहे तरीका
फायरलेस कुकिंग की क्लास में भी बच्चे रुचि लेते दिखे। उन्हें कुकिंग की एक्सपर्ट टीचर सलाद मेकिंग बता रही थीं। कुकिंग क्लास में न सिर्फ लड़कियां बल्कि लड़के भी खासा उत्साहित दिखे। शौर्य ने बताया मां की मदद के लिए कुकिंग क्लास ज्वॉइन की है। कुछ बच्चे सैंडविच और मसाला थम्सअप बनाने का हुनर सीखते दिखे। कशिश ने बताया कि सोमवार को उन्होंने शिकंजी बनाना सीखा था। घर जाकर सबके लिए शिकंजी बनाई भी थी।
आर्ट एंड क्राफ्ट में सिखा रहे लोककला
रचनात्मक कलाकृतियों बनाने की क्लास में फाइन आर्ट की टीचर बच्चों को लोककला सिखाती दिखीं। इसके लिए बच्चों को एक दिन पहले ही पेंटिंग और ड्राइंग का सामान लाने को कहा गया था। टीचर ने बच्चों को एक-एक शीट पर हल्के हाथों से ड्राइंग बनाकर दी जिसमें बच्चे रंग रहे थे। दूसरी ओर, पर्सनॉलिटी डेवलपमेंट की क्लास में एमबीए करने वाली टीचर बच्चों को टेबल मैनर सिखाती दिखीं।
डांस, गिटार और तबला वादन की क्लास
कुशल प्रशिक्षक के बजाय स्कूल टीचर डांस सिखा रही हैं। बच्चों को फ्री स्टाइल समेत पंजाबी गीतों पर डांसिंग की प्रैक्टिस कराई जा रही थी। इसमें डेढ़ सौ से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया है। वहीं, गिटार की क्लास में पहले से गिटार सीख रहे बच्चे को प्रशिक्षित किया जा रहा है। तबला वादन की क्लास में ‘ता धिन धिन ता’ सुर पर हाथों को बिठाना सिखाया जा रहा है। इंग्लिश स्पीकिंग व अन्य क्लासेज में भी स्थिति ठीकठाक दिखाई दी।
बच्चा पेट दर्द से कराहता रहा, नहीं दी दवा
ताइक्वांडो की क्लास में कक्षा तीन के छात्र आरव को अचानक तेज पेट दर्द उठा तो वह वहीं बैठ गया। प्रशिक्षक ने उसे पेट दर्द की दवा देने के बजाय बाहर बैठने को कह दिया। पास ही बनी सीढ़ियों पर आरव बैठकर पेट दर्द से कराहता दिखा। पास ही खड़े गार्ड को भी इसकी कोई परवाह नहीं थी। करीब आधे घंटे तक पेट दर्द से कराहने के बाद आरव को दवा दी गई। फिर पेरेंट्स को बुलाकर उसे घर भेज दिया गया।
समर कैंप का पूरा शेड्यूल बनाया गया था। एक्सपर्ट बच्चों कसे ट्रेनिंग दे रहे हैं। खेलों में छात्र और छात्राओं ने काफी तादाद में प्रतिभागिता की है। कुछ कमियां रह गई हैं, जिन्हें अगली बार दूर करने का प्रयास करेंगे।- डॉ. प्रियंका सरकार, प्रिंसिपल, माधवराव सिंधिया पब्लिक स्कूल