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‘देश में हर दो घंटे में एक प्रसूता की मौत’

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‘देश में हर दो घंटे में एक प्रसूता की मौत’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। बरेली आब्सटैट्रिक्स एवं गायनोकोलॉजी सोसाइटी की ओर से आईएमए हाल में पांचवीं यूपीकोग-2019 नेशनल कान्फ्रेंस में रविवार को प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञों ने आधुनिक इलाज, महिलाओं और प्रसूताओं में होने वाले रोगों पर विस्तार से चर्चा की। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में गायनिक विभाग की प्रोफेसर और फेडरेशन ऑफ ऑब्सटैट्रिक एंड गायनोकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की एमटीपी कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. भारती माहेेश्वरी ने बताया कि देश में गर्भधारण से लेकर प्रसव काल के दौरान हर दो घंटे पर एक प्रसूता की मौत होती है। असुरक्षित गर्भपात से आठ फीसदी प्रसूताओं को जान गंवानी पड़ रही है।
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दो दिवसीय कान्फ्रेंस के अंतिम दिन डॉ. भारती ने गर्भधारण में अल्ट्रासाउंड का महत्व और किन परिस्थितियों में वैध तरीके से गर्भपात कराया जा सकता है उसकी जानकारी दी। कहा, अगर गर्भ में पल रहा बच्चा जीने लायक नहीं या उसके अंग ठीक से विकसित नहीं हैं तो गर्भपात हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में ही गर्भपात कराया जा सकता है। उन्होंने गर्भपात के दौरान मौत का सबसे बड़ा कारण बिना चिकित्सक की सलाह से दवा लेना बताया। बताया कि सरकार से संस्तुति मांगी गई है कि 20 की जगह 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति दी जाए। स्त्री रोग विशेषज्ञ और पद्मश्री डॉ. ऊषा शर्मा ने कहा कि आठवीं कक्षा से ही लड़कियों को सेक्स एजुकेशन दी जानी चाहिए। आज लोगों की सोच बदली है, लड़कियों को स्कूल भेज रहे हैं, लेकिन सिलेबस में सेक्स एजुकेशन शामिल नहीं है जो होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि महिलाएं आज भी कई बीमारियों पर खुलकर बात नहीं कर पातीं। ऐसी महिलाओं की काउंसलिंग होनी चाहिए। हर डॉक्टर इलाज के साथ मरीजों की काउंसलिंग करे और कम से कम एक व्यक्ति को परिवार नियोजन के लिए जागरुक करें। अगर इसी प्रकार जनसंख्या बढ़ी तो आने वाले 20 वर्षों में भारत की जनसंख्या डेढ़ गुनी से ज्यादा हो जाएगी। डॉ. कृति और डॉ. नरेंद्र मेहरोत्रा ने बताया कि आज भी ज्यादातर महिलाएं पीरियड के समय गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं और इसी से कई खतरनाक बीमारियों से ग्रस्त हो जाती हैं। उनको शिक्षित करना बेहद जरूरी है। डॉ. रितु खन्ना ने बताया कि लड़कियों में शादी से पहले मासिक धर्म का चक्र गड़बड़ा जाता है। मोटापा, बाल झड़ने, बांझपन तक का शिकार हो जाती हैं। गर्भधारण के बाद ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय संबंधी बीमारी की जांच जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को फास्ट फूड खाने से बचने की सलाह दी। कान्फ्रेंस की अध्यक्षता आयोजन सचिव डॉ. नीरा अग्रवाल ने की। इस दौरान आयोजन अध्यक्ष डॉ. लता अग्रवाल, डॉ. भारती सरन, डॉ. लतिका अग्रवाल, डॉ. अनूप आर्या मौजूद रहे।
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