रामकथा के पंडाल में मुशायरा गलत नहीं
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राजनीति सेवाधर्म है। राजनीतिज्ञ को सिर्फ राष्ट्रवाद नहीं, कई धर्म निभाने होते हैं इसलिए उसमें न्याय क्षमता होनी भी आवश्यक है। धर्म में राजनीति का प्रवेश गलत है। संत मोरारी बापू ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात पिछले दिनों उनके कथा पंडाल में आयोजित मुशायरे पर कुछ संगठनों की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में कही।
संत मोरारी बापू कई दिनों से इज्जतनगर की कत्था फैक्ट्री में रामकथा सुना रहे हैं। बुधवार को उनके रामकथा पंडाल में ही मशहूर शायर व एमएलसी प्रो. वसीम बरेलवी की अगुवाई में मुशायरा हुआ था। रामकथा के पंडाल में मुशायरे के आयोजन पर कुछ संगठनों ने सवाल उठाए थे। शुक्रवार को प्रेस वार्ता में मोरारी बापू ने इसी संदर्भ में कहा कि व्यास का अर्थ व्यापकता है। कवि सम्मेलन के मंच से प्रतिभाओं ने अपनी रचनाएं सुनाईं, किसी को कोई गलत संदेश नही दिया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और मानव संवेदनाओं को ही शब्द प्रदान किए जो कहीं भी गलत नहीं कहा जा सकता। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने शहरवासियों से लोकसभा चुनाव में अधिक से अधिक मतदान करने का बी आहान किया। प्रेसवार्ता के बाद संत मोरारी बापू से मिलने सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह भी पहुंचे।
अयोध्या में आपसी सामंजस्य से बने भगवान राम का मंदिर
बरेली। सत्य, प्रेम और करुणा मेरी साधना का सार हैं। रामायण में इन्हीं तीन की सीख मिलती है, जिसे मैंने खुद में समाहित कर लिया है। प्रख्यात संत मोरारी बापू ने यह बात शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण आपसी सामंजस्य से होना चाहिए। इज्जतनगर की कत्था फैक्ट्री में रामकथा सुनाने आए मोरारी बापू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामकथा का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि अगर सौ लोग कथा सुनते हैं तो 35 लोग उससे प्रभावित भी होतेे हैं। उनमें ज्ञान, सद्भाव और सत्कर्मों का भाव जगता है। कथा जैसे धार्मिक आयोजनों से ही युवाओं में सत्संग की प्रवृत्ति बढ़ रही है।