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यह है निराली होली वाली रामलीला

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बरेली। क्या! होली में रामलीला। है न हैरानी की बात, पर बड़ी ब्रह्मपुरी वालों के लिए नहीं। यहां तो एक नहीं... दो नहीं, करीब 158 सालों से रामलीला का मंचन होता आ रहा है। इसमें आसपास के मोहल्ले भी जुड़ते हैं। छोटी बमनपुरी में अगस्त्य मुनि संवाद होता है तो साहूकारा में भरत मिलाप। होली वाले दिन शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाली राम बरात के बिना तो रंग उत्सव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। समापन राजतिलक के साथ होता है।
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होली में ही रामलीला क्यों
जनविश्वास है कि राम-रावण का युद्ध फाल्गुन शुक्ल की पूर्णमासी से शुरू हुआ और चैत्र शुक्ल की चतुर्दशी तक चला। पंडित केसरी नंदन कौशिक ने कहा-इसका उल्लेख कुछ प्राचीन ग्रंथों में भी है।

सांप्रदायिक सौहार्द की प्रतीक
आज जबकि हर तरफ जातिगत वैमनस्य व्याप्त है। सन 1861 से हो रही इस अभूतपूर्व रामलीला के लिए कई मुस्लिम गणमान्य लोगों ने भी सहयोग किया। जिसमें शहर नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष शार्किदाद खां भी शामिल रहे। इसके अलावा सौदागरान स्थित आला हजरत दरगाह से भी सहयोग मिला।
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रामलीला का स्वरूप
सन 1970 तक यह रामलीला मूक रही। पात्र केवल अभिनय करते, जबकि रामायण के पद्य की व्याख्या विद्वान करते। इसमें बरेली के मशहूर कथावाचक और पद्य रामायण रचियता पंडित राधेश्याम कथावाचक भी रहे। उस समय इन विद्वानों की व्याख्या में ऐसा रस होता था कि दर्शक अभिभूत होकर रोने लगते थे। काफी सालों तक तो मशालों की रोशनी में रामलीला का मंचन होता रहा। बाद में स्वरूप बदला। बाहर से आकर मंडली रामलीला का मंचन करने लगीं। जब कभी मंडली नहीं आई तो क्षेत्र के लोग आगे आए और रामलीला का मंचन रुकने नहीं दिया।

शासन से भी मिला सहयोग
यूनेस्को ने सन 2008 में भारत की रामलीला को वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल किया। अयोध्या शोध संस्थान के शोध में यह सामने आया कि अनेक जिलों में आर्थिक तंगी के कारण पारंपरिक रामलीला बंद हो रही है। इसी के चलते 2014-15 में वस्त्र, आभूषण और प्रशिक्षण के लिए बड़ी ब्रह्मपुरी की रामलीला के लिए भी एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई।

उतार-चढ़ाव
डेढ़ सौ साल पुरानी रामलीला ने कई उतार-चढ़ाव देखे। सन 1935 में ब्रिटिश सरकार ने रामलीला के मंचन पर प्रतिबंध लगा दिया। शहर के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित दीनानाथ मिश्र के नेतृृत्व में प्रतिबंध तोड़कर रामलीला का मंचन किया गया। वर्तमान में अतुल कपूर अध्यक्ष और राधाकृष्ण शर्मा ‘प्रह्लाद’ महामंत्री हैं। इस बार 15 मार्च से एक अप्रैल तक रामलीला का मंचन होगा।
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