फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एफएसओ हैरान.. बेसमेंट में आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर कैसे बना लिया

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। कर्मचारीनगर में स्थित नवोदय हॉस्पिटल के बेसमेंट में अग्निकांड होने के दूसरे दिन फायर डिपार्टमेंट के फायर सेफ्टी ऑफिसर सोमदत्त छानबीन के लिए पहुंचे। बेसमेंट में छोटी सी जगह में ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू बना देखकर उन्होंने हैरानी जताई। पूछा- यहां तो पार्किंग होनी चाहिए थी। उन्होंने अस्पताल के मालिक डॉ. योगेश से फायर एनओसी मांगी। इस पर डॉ. योगेश ने बताया कि उन्होंने जनवरी, 2018 में उप निदेशक (फायर) से संस्तुति करा ली थी। इसके मुताबिक 500 मीटर से कम क्षेत्रफल और 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारत को फायर एनओसी की आवश्यकता नहीं होती है। संस्तुति पत्र को देखकर एफएसओ बोले- ये तो ठीक है, लेकिन एनओसी कहां है। अगर नहीं थी तो आवेदन क्यों नहीं किया। एफएसओ ने बताया कि 16 फरवरी, 2018 में प्रमुख सचिव गृह ने आदेश जारी कर सभी अस्पतालों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी है।
विज्ञापन


बीडीए को फायर एनओसी जांचने के लिए लिखा
फायर डिपार्टमेंट ने बीडीए को भी लिखा है कि बिना फायर एनओसी जांचे नक्शा पास न करें। पत्र में इस बात का जिक्र है कि सभी अस्पतालों के लिए एनओसी अनिवार्य है। फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं लगाने पर लापरवाही से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।

सीएमओ ने एसीएमओ को सौंपी जांच
बरेली। सीएमओ ने नवोदय हॉस्पिटल में आग लगने के मामले की जांच शुरू करा दी है। उन्होंने एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को स्थलीय निरीक्षण करके रिपोर्ट देने को कहा है। सीएमओ के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि हॉस्पिटल को जितने बेड पर मरीज भर्ती करने की अनुमति दी गई है, उससे अधिक बेड डाले गए हैं। अब आगे की कार्रवाई एसीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर होगी। सीएमओ ने बताया कि नवोदय हॉस्पिटल की फाइल अप्रैल में नवीनीकरण के लिए आई थी। अब सामने आया है कि फाइल में फायर डिपार्टमेंट की एनओसी थी ही नहीं, सिर्फ संस्तुति पत्र था। हालांकि फिर भी नवीनीकरण कर दिया गया था। सीएमओ अब सभी अस्पतालों की फायर डिपार्टमेंट की एनओसी की जांच कराने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन


55 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन नहीं, सौंपे थे शपथपत्र
सीएमओ ऑफिस के मुताबिक, शहर में 298 अस्पताल संचालित है। इनमें करीब 55 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन सीएमओ कार्यालय से नहीं है। इन अस्पतालों में हादसे होने को लेकर प्रबंधन को तलब किया गया तो सीएमओ कार्यालय में शपथपत्र दिए गए थे कि हादसा होने की सूरत में अस्पताल प्रबंधन खुद ही जिम्मेदार होंगे। सीएमओ कार्यालय ने भी पल्ला झाड़ लिया था। इन 55 अस्पतालों में हादसा होने पर मरीजों की जान खतरे में पड़ना तय है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें