सात दिन से खड़े ट्रक के चावल से आने लगी घोटाले की गंध
कभी क्रय केंद्र का तो कभी राइस मिल का बताया जा रहा चावल
270 बोरी है चावल, पीडीएस का होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। कुछ राशन माफिया जिले में पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) गोदामों से चावल और गेहूं उठकर इन माफियाओं के गोदामों में सीधे पहुंच जाता है। सात दिन पहले चावल भरा ट्रक पकड़ा गया। इस मामले में जांच कर रहे नायब तहसीलदार ने छह दिन बाद रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी है। इसमें चावल को सीएमआर (कस्टम राइस) साबित करके क्लीनचिट देने का प्रयास किया गया। नायब तहसीलदार ने यूपी स्टेट एग्रो के क्रय केंद्र पड़रिया तुला का सीएमआर होने की बात कही, लेकिन इस केंद्र पर इतनी खरीद न होने के कारण उसी चावल को राइस मिल की सिक्योरिटी (गारंटी मनी) के तौर पर पेश किया जा रहा है। इससे प्रकरण में लीपापोती किए जाने के संभावना बढ़ गई है।
पीलीभीत-बस्ती मार्ग पर एलआरपी चौकी पुलिस ने रविवार की शाम चावल भरा ट्रक पकड़ा था। चालक कोई कागज नहीं दिखा सका था। चौकी इंचार्ज जेपी यादव ने चालक को कागज लाने के लिए छोड़ दिया था। इसके बाद वह नहीं लौटा। इसी दौरान जांच में ट्रक का नंबर फर्जी पाया गया, जिससे गड़बड़ी की आशंकाएं बढ़ गई। उधर, एसडीएम सदर डॉ. अरुण कुमार सिंह ने जांच नायब तहसीलदार डॉ. लालकृष्ण और पूर्ति निरीक्षक सर्वेश कुमार को सौंप दी। हले दिन ब्लॉक सदर के पड़रिया तुला क्रय केंद्र का सीएमआर होना बताया गया, लेकिन यहां क्रय केंद्र खुला नहीं मिला। अगले दिन ही राइस मिलर्स समेत अनाज माफिया सक्रिय हो गए और बिजुआ ब्लॉक के पड़रिया तुला केंद्र के गेहूं का सीएमआर चावल होना करार दिया जाने लगा। खास बाज यह है कि नायब तहसीलदार ने छह दिन बाद शनिवार को जो रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी, उसमें यह चावल पड़रिया तुला क्रय केंद्र पर खरीदे गए धान का सीएमआर बता दिया गया।
नायब तहसीलदार की जांच में निकला महादेव इंडस्ट्रीज का चावल
नायब तहसीलदार ने चावल को महादेव इंडस्ट्रीज महेवागंज का बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक यूपी एग्रो के पड़रियातुला क्रय केंद्र का धान महादेव इंडस्ट्रीज को दिया गया था, जिसका चावल बनाकर इंडस्ट्रीज से गोदाम जा रहा था। हालांकि नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में चावल के साथ चालान के कागज न होने के पीछे वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इससे उनकी जांच रिपोर्ट में झोल नजर आ रही है।
धान खरीदा कम सीएमआर बता दिया ज्यादा
पड़रिया तुला केंद्र पर 1472 क्विंटल धान खरीदा गया। खरीदे धान के सापेक्ष 67 प्रतिशत के हिसाब से 986 क्विंटल सीएमआर चावल एफसीआई डिपो में जाना था, लेकिन इस केंद्र के नाम से 1080 क्विंटल सीएमआर एफसीआई में भेजा जा चुका है। इससे 270 बोरी यानी 135 क्विंटल सीएमआर और भेजे जाने की रिपोर्ट में खुलासा करना जांच का सवालों में खड़ा कर रही है।
तो 135 क्विंटल चावल कहां गया
जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 270 क्विंटल यानी 540 बोरी चावल भेजा गया, जिसे दो ट्रकों में लोड करके शनिवार को राइस मिल से रवाना किया गया। इसके बाद एक ट्रक पकड़ा गया, जबकि दूसरे ट्रक के बारे में कोई जानकारी अधिकारियों के पास नहीं है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बताया जा रहा है कि चावल का चालान उसी दूसरे ट्रक के चालक के पास थे।
पांच किलोमीटर दूरी, फिर भी दो दिन पहले भेजा ट्रक
जांच अधिकारी ने बताया कि शनिवार को मिल से चावल भेजा गया, जबकि रविवार को एफसीआई डिपो में उतार बंद रहता है। इस संदेह को दूर करने के लिए जांच अधिकारी ने मिल मालिक के हवाले से कहा है कि सोमवार को लाइन में आगे लगने के लिए ट्रक को दो दिन पहले रवाना किया गया। जबकि महेवागंज से लखीमपुर स्थित एफसीआई डिपो की दूरी महज पांच किलोमीटर ही है।
क्या है सिक्योरिटी मनी
पिछले वर्षों में राइस मिलों द्वारा गड़बड़ी किए जाने के मामलों को देखते हुए सिक्योरिटी मनी जमा कराने का प्राविधान क्रय नीति में किया गया है। इसके तहत राइस मिल को बैंक गारंटी के तौर पर आठ लाख की एनएससी जमा करनी है या फिर एक लॉट चावल (270 क्विंटल) अग्रिम तौर पर जमा कराना है।
तो जिस ट्रक में लदा चावल, वह भी फर्जी
चावल लदे ट्रक में फर्जी नंबर प्लेट लगी होने के मामले में चार दिन बाद एसपी के हस्तक्षेप पर सदर कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी, लेकिन रिपोर्ट लिखे दो दिन बीत गए हैं। फिर भी ट्रक का मालिक कौन है, कहां से खरीदा गया है, इन प्रारंभिक पहलुओं की भी जांच नहीं कर सके हैं। इससे साफ है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी मामले में लीपापोती की जा रही है। एलआरपी चौकी इंचार्ज जेपी यादव की ओर से दर्ज रिपोर्ट में अज्ञात ट्रक स्वामी और चालक के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज है। इस मामले को गोलमाल करने में जिले के एक पुलिस अफसर का नाम भी उछल रहा है। इस बाबत इंस्पेक्टर (अपराध) ऋषिदेव सिंह से जब पूछा गया तो वह कहते हैं कि आप तो सब जानते हो। अभी ट्रक मालिक और चालक आदि का पता नहीं चल पाया है। इतना पता है कि ट्रक हरियाणा से खरीदा गया था।
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एसडीएम बोले, पीडीएस का नहीं है चावल पर घपलेबाजी लग रही
एसडीएम सदर डॉ. अरुण कुमार सिंह का कहना है कि ट्रक में भरे चावल के बोरों पर पीडीएस की मोहर नहीं है। इससे पीडीएस का नहीं लग रहा है, लेकिन खामियों के कारण घपलेबाजी लग रही है। संभव यह भी है कि पीडीएस के चावल बोरे को बदल दिया गया हो, लेकिन प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है, फिर भी हर पहलू पर जांच की जाएगी। फिलहाल बरामद चावल की जांच नायब तहसीलदार और पूर्ति निरीक्षक से कराई गई है, जिन्होंने रिपोर्ट में बताया है कि महादेव इंडस्ट्रीज का चावल है जो एफसीआई डिपो भेजा गया था।
वर्जन.....
यूपी एग्रो के धान खरीद केन्द्र से हमें हलिंग के लिए धान दिया गया था, जिसका चावल बनाकर एसएफसी गोदाम के लिए भेज रहे थे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जांच कर रहे हैं। हमने अपने अभिलेख भी प्रस्तुत कर दिए हैं।
- दीपक अग्रवाल, प्रोप्राइटर, महादेव इंडस्ट्रीज
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पकड़े गए चावल की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन के बाद ही मामले में अगली कार्रवाई की जाएगी। तब तक चावल भरा ट्रक पुलिस कस्टडी में है।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम