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माननीयों का है साथ, इसलिए बारातघरों की मनमानी करें बर्दाश्त

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अमर उजाला- लाइव रिपोर्ट
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फ्लैग- बिना नक्शा पास शहर में 200 बारातघर

हेडिंग- माननीयों का है साथ, इसलिए बारात घरों की मनमानी करें बर्दाश्त

- पार्किंग के बिना लगाते हैं जाम, बिना परमीशन देर रात चलाते हैं डीजे
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केस-1, समय- 10:30 बजे रात। स्थान- सुरेश शर्मा नगर चौराहे से आगे स्थित बारातघर। शहर के बड़े बारात घरों में से एक इस बारातघर में शादियों के अलावा बड़े राजनीतिक दलों की मीटिंग भी होती है। बारातघर में न पार्किंग है, न सेटबैक। बारातें रुकने पर पार्किंग सड़क पर होने से अक्सर जाम लगता है।
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केस-2, समय -10:45 बजे रात। स्थान- संजयनगर गली नंबर चार। दो बारातघर एक साथ बने हैं। इनमें न तो सेटबैक छूटा है, न ही पार्किंग। जब भी शादी बारातें रुकती हैं, या फिर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की मीटिंग होती है तो उनके वाहन सड़क तक पार्क होते हैं। संजयनगर मार्केट जाने वालों को जाम का सामना करना पड़ता है।
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केस-3, समय- 11:00 बजे रात। स्थान- त्रिमूर्ति नर्सिंग होम से थोड़ा आगे बने बारातघर का हाल भी अन्य बारातघरों की तरह ही है। बृहस्पतिवार रात 11 बजे यह बारात घर बंद था। मगर, जब यहां शादी बारातें होती हैं तो वाहनों की पार्किंग सड़क तक होने के अलावा लोग आगे आकर हुड़दंग करते हैं। इससे मॉडल टाउन जाने वाले लोगों को जाम से होकर गुजरना पड़ता है।

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शहर में लगभग दो सौ से अधिक बारातघर हैं। अधिकांश के बीडीए से नक्शे स्वीकृत नहीं हैं। प्राधिकरण के नियमानुसार इन बारातघरों के नक्शे स्वीकृत हो भी नहीं सकते, क्योंकि बारातघर संचालकों ने इनका निर्माण कराते समय न तो पार्किंग के लिए जगह छोड़ी है, न ही सेटबैक। 14 अप्रैल से शादी ब्याह का सीजन शुरू होने वाला है। तब इन बारातघरों में भी समारोह होंगे। उसमें हिस्सा लेने वाले लोगों के वाहन सड़क तक खड़े होकर जाम लगाएंगे।
यह बरसों से होता चला आ रहा है। ढाई दशक पहले बीडीए के तत्कालीन अफसरों के नकारेपन की वजह से बिना नक्शा स्वीकृत कराए अवैध रूप से बने बारातघर शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। सेटबैक और पार्किंग की जगह नहीं छोड़ने के अलावा बारातघर की फायर समेत तमाम विभागों से एनओसी तक नहीं ली गई है। हाल ही में जब बीडीए ने बारातघर मालिकों पर नक्शा मंजूर कराने या जुर्माना चुकाकर कंपाउंडिंग कराने का दबाव बनाया तो माननीय आड़े आ गए। वजह, 2019 का चुनाव जो सामने है। बीडीए अवैध बारातघरों की सीलिंग और ध्वस्तीकरण का 23 मार्च से अभियान चलाने वाला था, लेकिन माननीयों ने अफसरों पर दबाव बनाकर अभियान रुकवा दिया। लिहाजा, बारातघर संचालकों को एक बार फिर मनमानी का मौका मिल गया। इससे पहले 2011 में भी सांसद और विधायकों ने अफसरों पर दबाव बनाकर अवैध बारातघरों के खिलाफ बीडीए का अभियान अड़ंगा डालकर रुकवा दिया था। तबसे बिना पार्किंग के बने बारातघर सड़क पर जाम लगा रहे हैं और बिना प्रशासन की परमीशन के बारातें रुकवाकर डीजे बजवाते हैं। प्रशासन भी सत्ता के दबाव में मूकदर्शक बनकर यह सब देखता रहता है।


इनसेट :
सात अप्रैल डेडलाइन और मात्र 21 बारातघरों की कंपाउंडिंग
बरेली। अवैध बारातघरों को सील और ध्वस्त करने का अभियान 23 मार्च से चलना था। सांसद और विधायकों के दबाव में बीडीए ने अवैध बारातघर संचालकों को सात अप्रैल तक निर्धारित जुर्माना जमाकर कंपाउंडिंग कराने की डेडलाइन तय की थी। कमिश्नर की बैठक में बीडीए की ओर से बारातघर संचालकों को चेतावनी दी गई थी कि अगर निर्धारित समय सीमा तक जुर्माना जमा नहीं किया तो आठ अप्रैल से बारातघरों को सील करने और ध्वस्तीकरण का अभियान चलाया जाएगा। इसके बावजूद 13 दिन में मात्र 21 बारातघरों ने करीब 60 लाख रुपये जमा कर अपने बारातघरों की कंपाउंडिंग प्रक्रिया शुरू की है। पौने दो सौ से ज्यादा बारातघर संचालक बारातघरों की कंपाउंडिंग कराने नहीं आए, न ही जुर्माने की रकम अदा की। इन बारातघरों के नक्शे बीडीए से स्वीकृत नहीं हैं।
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अवैध बारात घरों के विरुद्ध आठ अप्रैल से चलेगा अभियान
बरेली। बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि मंडलायुक्त की मीटिंग में बारातघर संचालकों के सामने सात अप्रैल तक प्राधिकरण से तय जुर्माना अदा कर कंपाउंडिंग कराने की बात तय हुई थी। अब तक मात्र 21 बारातघर मालिक ही कंपाउंडिंग कराने आए हैं। बीडीए सचिव को आठ अप्रैल से इंजीनियरों की टीम के साथ अवैध बारातघरों को सील और ध्वस्त करने का अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध बारातघरों के खिलाफ अभियान चलाने की बात जनप्रतिनिधियों के भी संज्ञान में है। पिछली बार जनप्रतिनिधियों की पहल पर ही अभियान आगे बढ़ाकर बारातघर मालिकों को मोहलत दी गई थी।
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