फोटो- कैरीकेचर
कैचबर्ड- रेरा का फेरा)
साइड फ्लैग- नौ लाख का अर्थदंड
हेडिंग- समय पर फ्लैट नहीं देने पर बिल्डर पर जुर्माना
सब हेडिंग- दिल्ली के बिल्डर ने नोएडा में बनाए फ्लैट
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। दिल्ली के बिल्डर ने नोएडा में फ्लैट बनाकर 2015 में देने का आश्वासन देकर 56 लाख में बुकिंग की। बायर बिल्डर एग्रीमेंट की शर्तों के हिसाब से ग्राहक ने 39 लाख रुपये भी दे दिए, लेकिन बिल्डर ने फ्लैट पर कब्जा देना तो दूर, निर्माण तक पूरा नहीं कराया। बुकिंग कराने वाले ने रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में शिकायत दर्ज कराई। इस पर बरेली विकास प्राधिकरण ने दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया, लेकिन बिल्डर नहीं आए। बीडीए ने बिल्डर पर नौ लाख का अर्थ दंड लगाकर एक माह के अंदर शिकायतकर्ता को जमा रकम लौटाने के निर्देश दिए हैं।
जगदीप कपूर और मंजू कपूर निवासी केशवकुंज अपार्टमेंट सेक्टर 22 द्वारिका नई दिल्ली ने रेरा के तहत नोएडा प्राधिकरण में ऑनलाइन शिकायत की कि पीएसए इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड ने संपदा लिविया प्रोजेक्ट में भूखंड संख्या जीएच-ओ-6 बी, सेक्टर सीएचआई- 5 ग्र्रेटर नोएडा में भवन संख्या ई-14 टॉवर-4 में उन्हेें फ्लैट की बुकिंग की, इसकी कीमत 56 लाख 30 हजार 73 रुपये थी। बायर-बिल्डर एग्रीमेंट के बिंदु संख्या 27 के तहत बिल्डर फर्म को एक अगस्त, 2015 तक फ्लैट का निर्माण पूरा कर कब्जा देना था। बिल्डर पीएसए इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड ने तय समय से दो साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं कराया। वर्तमान में निर्माण कार्य बंद है, जिससे वह फ्लैट पर कब्जा देने की स्थिति में नहीं है। आवंटी के मुताबिक वह अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकता। इसलिए उसकी जमा की गई 39 लाख 69 हजार तीन रुपये की रकम 18 फीसदी ब्याज समेत समेत वापस की जाए। आवंटी ने दो लाख रुपये अर्थ दंड देने की भी मांग की। बरेली विकास प्राधिकरण में इस मामले की सुनवाई प्राधिकरण उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार ने की। बिल्डर की ओर से सुनवाई में कोई भी मौजूद नहीं रहा, जबकि शिकायतकर्ता इस दौरान उपस्थित रहे। बीडीए उपाध्यक्ष ने पीएसए इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आवंटी को समय से फ्लैट न देने पर आवंटन मद में जमा 39.69 लाख रुपये 18 प्रतिशत ब्याज समेत (लगभग सात लाख रुपये) और दो लाख रुपये अर्थ दंड आदेश की तारीख से एक माह के अंदर देने का आदेश दिया है। जुर्माना अदा करने की सूचना से प्राधिकरण को भी अवगत कराने को कहा है।
दूसरे प्राधिकरण में होती है सुनवाई
रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में शिकायत का प्रावधान यह है कि जिस प्राधिकरण से संबंधित शिकायत होती है, उसकी सुनवाई दूसरे प्राधिकरण में स्थानांतरित कर दी जाती है, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे। किसी भी तरह का पक्षपात न हो। सरकार मानती है कि किसी भी प्राधिकरण के अफसर या इंजीनियर वहां के बिल्डरों के संपर्क में रहते हैं और वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए रेरा में होने वाली शिकायतों की जांच दूसरे प्राधिकरण को ट्रांसफर करके उनका निस्तारण कराया जाता है।