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पर्दे से ढक दिए गए एक्सेलेटर

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हेडिंग-- डेढ़ साल से लावारिस पड़े एक्सेलेटर हो रहे कबाड़
दो बारिश झेल चुके, तीसरी के बाद नहीं रहेंगे किसी लायक
अब यात्रियों ने बना दिया है कूड़ादान, अफसर अंजान बने
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रेलवे ने खुले में पड़े एक्सेलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) को एक ओर से तो ढक दिया है, लेकिन दूसरी ओर खुला छोड़ दिया है। लावारिस हाल में पड़े एक्सेलेटर कबाड़ होते जा रहे हैं। यात्रियों ने अब वहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया है। रेलवे के जानकारों का कहना है कि दो महीने बाद बरसात शुरू हो जाएगी। इसके बाद एक्सेलेटर किसी लायक नहीं रहेंगे।
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अखबारों में खबर छपने के बाद नींद से जागे रेलवे प्रशासन ने आनन-फानन ने निर्माण अनुभाग से मल्टीपरपज हाल की साइड से एक्सेलेटर को पर्दे से ढकवा दिया। इससे रेता और बजरी से तो उनकी सुरक्षा हो गई है लेकिन दूसरी ओर से खुला छोड़ दिया गया है। उधर, अब यात्रियों ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया है। रेलवे के जानकारों का कहना है कि डेढ़ साल से लावारिस पड़े एक्सेलेटर अब तीसरी बरसात झेलने के बाद किसी लायक नहीं रहेंगे। तब एक्सेलेटर के नाम पर सिर्फ कबाड़ ही बचेगा। बता दें कि जंक्शन पर लगने के लिए आए एक्सेलेटर डेढ़ साल से वेटिंग हॉल के सामने खुले में पड़े हैं। कुछ दिन पहले ठेकेदार ने मल्टीपरपज हाल के निर्माण के लिए आई रेता-बजरी भी एक्सेलेटर के पास डाल दी।
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