बरेली। दिल्ली-रामपुर हाईवे पर मिनी बाईपास चौराहे से लेकर कर्मचारी नगर चौराहे और कुदेशिया फाटक तक का इलाका आवासीय न होकर पूरी तरह व्यावसायिक है। यहां जमीनों के सर्किल रेट भी इस इलाके के कामर्शियल होने की गवाही देते हैं, लेकिन बीडीए के मास्टर प्लान में कुछ हिस्से को छोड़कर अधिकांश एरिया आवासीय है। ये सब यूं ही नहीं हो गया। इस रोड पर एक नेता जी का नर्सिंग होम तो दूसरे नेता का आलीशान क्लब है। बीडीए के इंजीनियरों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि उनकी शह पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग खड़ी हो गईं। नेताओं-अफसरों के गठजोड़ की बदौलत यहां आवास तो कम दिखते हैं, लेकिन कारोबारी प्रतिष्ठान दूर से ही चमक रहे हैं।
अमर उजाला ने रामपुर हाईवे के मिनी बाईपास चौराहे से कर्मचारी नगर चौराहे तक रोड के दोनों ओर बने भवनों की गतिविधियों का जायजा लिया तो 90 फीसदी से अधिक एरिया कामर्शियल दिखा। मिनी बाईपास चौराहे से कर्मचारी नगर को जाने वाली रोड के दाहिनी ओर शुरूआत में ही किला नदी किनारे तीन मंजिला होटल/ बैंक्वेट ह