बरेली। फेस्टिवल सीजन आते ही कारोबारी पुराने उत्पाद और अखाद्य पदार्थ बड़ी मात्रा में बाजारों में उतार देते हैं। इन दिनों रमजान माह चल रहा है, गली मोहल्लो में खुलेआम रंगीन कचरी और खुले में रखकर खजूर बिक रहा है, लेकिन एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन) विभाग बेखबर है। उधर, लोगों का कहना है कि एफएसडीए सिर्फ दिवाली और होली पर ही वसूली के लिए अभियान चलाता है।
एक माह तक सबसे लंबा चलने वाला त्योहार रमजान ही है। इस पर हर दिन बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थोें में खजूर, सिवईं, रंगीन कचरी, कटे फल और अन्य सामग्री बाजार में बिकती है। पिछले दिनों एफएसडीए मुख्यालय ने गर्मियों में बिकने वाले कटे फल, खुले में खजूर, पुरानी सिवइयां आदि पर निगरानी रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर अफसरों में हलचल नहीं दिखी। विभाग इन दिनों चुनाव आचार संहिता की चादर ओढ़कर सो गया है। पिछले सप्ताह रमजान शुरू होने से पहले ही बाजार में रंगीन कचरी, सिवईं, खुला खजूर की आमद होने लगी थी। साथ ही मछली और मांस का खुदरा बाजार में मानकों की अनदेखी होना शुरू हो गई। एक अनुमान के मुताबिक रमजान में करीब दो करोड़ रुपये का हर दिन खाद्य पदार्थों का कारोबार हो रहा। इसमें खजूर, फल और अन्य आइटम भी शामिल हैं।
सिवईं कारोबार में खेल
उत्पादक पुराना बचा माल रियायती कीमत खुले बाजार में उतार देते हैं। रमजानों में सिवईं, खजूर आदि आइटम खुले में ज्यादा बिकते हैं। इसलिए ग्राहक भी हर दिन खरीदारी कर रहा है। कम बजट वाले लोगों में यह आइटम खूब खप जाते हैं। इसलिए एक्सपायरी माल खपाने का सबसे अच्छा मौका त्योहार ही माने जाते हैं।
मुख्यालय के आदेशों की हो रही अनदेखी
मुख्यालय ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे कि पुराने स्टाक की सिवइयां और खुले में खजूर बिक्री कतई न होने पाए, बावजूद इसके हर तरफ खुलेआम गली-गांव तक कारोबार हो रहा है।
बेहद लापरवाही है, गर्मियों में अभियान चलाया जाना चाहिए। खुले में खजूर, रंगीन कचरी और पुराने स्टाक की सिवइयां बाजार में बिकने की जानकारी मिली है। एफएसडीए टीमें चेकिंग कर ऐसा माल सीज कर सैंपल करेगी।
- संजय पांडे, सहायक आयुक्त, एफएसडीए