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इस रिहायश में भी जो चाहे ‘खरीद’ लीजिए

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बरेली। बीडीए के मास्टर प्लान में गांधी उद्यान से चौकी चौराहा तक का इलाका भी रिहायशी है, हालांकि यहां रिहायश के नाम पर सिर्फ पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों और इंजीनियरों की आवासीय कॉलोनी है। बाकी सड़क पर दोनों ओर बड़े-बड़े नर्सिंग होम, शॉपिंग मॉल, कांपलेक्स, सिनेमाघर, पेट्रोल पंप, क्लीनिक, बैंक, एटीएम, पैथोलॉजी सेंटर, रेस्टोरेंट, होटल आदि वह सब कुछ है जो इस इलाके को पूरी तरह कामर्शियल एरिया साबित करने को काफी है। बीडीए के मास्टर प्लान और मौके के हालात में इतना फर्क क्यों है, यह समझने वाली बात है।
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‘अमर उजाला’ ने गांधी उद्यान से चौकी चौराहे तक रोड के दोनों ओर बनी इमारतों का जायजा लिया तो हालात मास्टर प्लान से उलट मिले। गांधी उद्यान से आगे बढ़ने पर रोड के दाहिनी ओर बच्चों के डॉक्टर का प्राइवेट क्लीनिक है। उसके ठीक बगल में नर्सिंग कॉलेज और नर्सिंग होम का कई मंजिल ऊंचा आलीशान भवन बना है। थोड़ा आगे चलने पर तीन राष्ट्रीयकृत बैंक हैं। उनके तीन से चार एटीएम भी लगे हैं। कोने पर पैथोलॉजी सेंटर बना है, जिसने पार्किंग के अंदर मरीजों के अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन की मशीनें लगा रखी हैं। रोड पर पार्किंग होने से हर समय जाम लगता है। पेट्रोल पंप से चंद कदम आगे चलने पर एक और बिल्डिंग है, जो देखने पर किसी चिकित्सक का क्लीनिक लगती है। इस बिल्डिंग के निकट ही नया कामर्शियल भवन बन रहा है। अब तक इस नए भवन की पार्किंग का अता-पता नहीं है। हालांकि भवन के बाहर बीडीए से नक्शा स्वीकृत होने का बोर्ड लगा है। रामपुर गार्डन के अंदर जाने वाली रोड के निकट केंद्र सरकार के एक बड़े विभाग का भवन है। चंद आगे चलने पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग है, जिसके नीचे वाले हिस्से में साड़ी केंद्र खुला है और ऊपर के हिस्से में ज्वैलरी समेत अन्य शोरूम खुले हैं। बगल में होटल और उसके आगे चलकर चौकी चौराहे से ठीक पहले रेस्टोरेंट है। रेस्टोरेंट जहां खत्म होता है, वहां से महिला थाने के आवासीय भवन और थाने की बिल्डिंग शुरू हो जाती है।
रोड के दूसरी ओर गांधी उद्यान से आगे सर्किट हाउस जाने वाली रोड के बगल में चार मंजिल ऊंचा कांपलेक्स है। इसमें संचार कंपनियों के दफ्तर खुले हैं, जिनसे करोड़ों का कारोबार संचालित होता है। इस बिल्डिंग के ठीक बगल में बेकरी और फिर बड़ा शोरूम है। प्राइवेट बैंक का आलीशान भवन है। प्राइवेट कंपनियों के दफ्तर है। फिर एक बड़ा नर्सिंग होम है, जिसमें पार्किंग बाहर की ओर है। नर्सिंग होम का बेसमेंट, जो पार्किंग की जगह है, उसमें इमरजेंसी वार्ड खोला गया है। नियमानुसार यहां वाहन खड़े होने चाहिए, लेकिन बिल्डिंग के नीचे इमरजेंसी मरीज भर्ती किए जाते हैं। उसके ठीक बगल में एक सरकारी दफ्तर का भवन है। उसके बगल में मंदिर और आस-पास अस्थायी ढाबे खुले हैं, जिन्होंने सड़क तक अतिक्रमण कर रखा है। उससे पहले कपड़ों का एक बड़ा शोरूम भी है फिर पीडब्ल्यूडी की आवासीय कॉलोनी है। राजकीय निर्माण निगम, पीडब्ल्यूडी के ऑफिस खुले हुए हैं। कुल मिलाकर रोड के दोनों ओर का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा व्यावसायिक है। फिर भी बीडीए के मास्टर प्लान में यह इलाका रिहायशी दर्शाया गया है।
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