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किसानों के बजाय कंपनियों को ही मिला फायदा

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बरेली। मुंशी प्रेमचंद्र के उपन्यास ‘गोदान’ का महत्वपूर्ण पात्र गरीब किसान होरी महाजन से रकम उधार लेकर पूरे सीजन मेहनत करता है, मगर खेत में फसल जब पकने को होती तो उसे जानवर खा गए। वह मन मसोसकर रह गया। ऐसे न जाने कितने किसान कभी बारिश तो कभी ओलावृष्टि या जंगली गायों से फसल की बर्बादी का सामना करते हैं। न जाने कितने तो आत्महत्या भी कर लेते हैं। किसानोें को प्राकृतिक आपदा के नुकसान की भरपाई करने के लिए पीएम मोदी ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा’ योजना प्रारंभ की। बीमा कंपनियों ने किसानों की फसल के बीमे करके बैंकों के माध्यम से प्रीमियम तो जमा करा लिया, मगर जब बारिश या ओलावृष्टि से फसल नुकसान का क्लेम देने की नौबत आई तो उसमें नष्ट फसल का सर्वे कराने से लेकर क्लेम देने तक में तमाम आनाकानी की गई। रबी की फसल के नुकसान का तो अभी सर्वे तक पूरा नहीं हो पाया है।
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फसल बीमा योजना में बरेली में खरीफ सीजन में बीमा कंपनी ने 23424 किसानों का 26869 हेक्टेयर एरिया में धान, सरसों और दलहन फसलों का बीमा किया। इसमेें जिन किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बने थे, उनका करीब 1.75 करोड़ प्रीमियम बैंक के जरिए बीमा कंपनी ने जमा करा लिया। इसी तरह रबी सीजन में 14161 किसानों का 11940 हेक्टेयर एरिया में गेहूं समेत सीजन की बाकी फसलों का बीमा कर 90 लाख का प्रीमियम जमा कराया गया। इस तरह बीमा कंपनी ने रबी और खरीफ दोनों सीजन में 37585 किसानों से 2.65 करोड़ रुपये का बीमा प्रीमियम तो वसूल लिया, मगर जब प्राकृतिक आपदा (जैसे ओलावृष्टि और बारिश आदि) में फसल नुकसान हो गया तो मुआवजा नहीं दिया।
आलमपुर जाफराबाद, भोजीपुरा और बहेड़ी में बड़े पैमाने पर गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसल नष्ट हो गई। 177 किसानों ने बीमा कंपनी क्लेम पर दावा किया। इसमें अब तक बीमा कंपनी 84 दावों का सर्वे कर पाई है। बाकी 93 दावों का सर्वे अब तक पूरा नहीं हो पाया।
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क्या है क्लेम देने का नियम
अगर किसी किसान की फसल प्राकृतिक आपदा जैसे बारिश, ओलावृष्टि या अन्य वजहों से नष्ट हो जाए तो किसानों को बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर 18002095959 पर 72 घंटे के अंदर फसल नुकसान की सूचना देनी होती है। अगर किसान टोल फ्री नंबर पर मौखिक सूचना नहीं देना चाहे तो वह कृषि विभाग के किसी भी दफ्तर, तहसील या ब्लाक में लिखित सूचना दे सकता है। बीमा कंपनी किसान की मौखिक या लिखित सूचना पर अपनी टीम मौके पर भेजकर सर्वे कराती है। उस सर्वे में जो भी नुकसान का आकलन होता है, उसी आधार पर क्लेम दिए जाते हैं।

दो तरह के होते हैं क्लेम
फसल नुकसान होने पर बीमा कंपनी किसानों को दो तरह से क्लेम देती है। नंबर एक- व्यक्तिगत क्लेम और नंबर दो- एवरेज उपज से कम निकलने पर सामूहिक क्लेम। बरेली में व्यक्तिगत क्लेम कितने किसानों को कब मिला, इसका कोई भी डाटा न तो कृषि विभाग के पास है, न ही बैंकों में। सामूहिक क्लेम में बीते खरीफ सीजन में 847 किसानों ने फसल नुकसान के दावे किए थे। मगर, जब बीमा कंपनी ने जब अपनी टीम से सर्वे कराया तो नुकसान बहुत कम दर्शाकर किसानों को मात्र 28 लाख का क्लेम दिया गया।

गन्ना समेत कई फसलें बीमा से बाहर
बीमा कंपनियों ने तहसील, ब्लाक या गांव वार फसलों को चिह्नित कर रखा है कि इन फसलों का ही बीमा होना है। जैसे- खरीफ में धान, सरसों, उड़द या दलहन रबी में गेहूं समेत कुछ फसलें ही बीमा के दायरे में हैं। बाजरा समेत अन्य महत्वपूर्ण फसलों को बीमा दायरे से बाहर रखा गया है।

क्या कहते हैं किसान

फसल बीमा स्कीम बहुत अच्छी है। मगर इसमें एक ही कंपनी को बीमा करने के लिए अधिकृत किया गया है, जो गलत है। अन्य कंपनियां भी आएं तो कंपटीशन में किसानों को कम प्रीमियम पर ज्यादा लाभ होगा। अभी तो बीमा कंपनी बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के केवल बैंकों से प्रीमियम वसूल लेती हैं, मगर जब क्लैम देने की बारी आती है तो आनाकानी करने लगती हैं।
- अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान

फसल बीमा हमने अपनी 2.35 हेक्टेयर फसल का कराया था। दो हजार रुपये प्रीमियम बैंक से कटा। हालांकि मेरा तो नुकसान नहीं हुआ। मगर पड़ोस में नुकसान हो गया तो बीमा कंपनी के सर्वेयर नुकसान का सर्वे करने ही नहीं आए। जब क्लेम का दावा किया गया तो बीमा कंपनी ने इतनी बातें घुमा दीं कि क्लेम नहीं मिल पाया। बीमा कंपनी के न तो कर्मचारी हैं, न ही बरेली में अपना दफ्तर है।
- ताराशंकर मौर्य, किसान तिगरा

मेरी 2.5 एकड़ जमीन है। उसमें धान, सरसों और दलहन की फसलें बोई थीं। बारिश में धान पूरा गिर गया। बीमा कंपनी को सूचना भी दी, लेकिन न तो कोई सर्वेयर मौके पर आया, न ही किसी ने सर्वे किया। क्लेम भी नहीं मिला क्योंकि हमें खेत में धान काटने की जल्दी थी। बारिश में गिरा धान ज्यादा दिन खेत में रखने से वह सड़ने लगता है। सरकारी सिस्टम से तो काम चलता नहीं। जो धान बचा था, वह भी चला जाता।
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- नरेश सिंह, किसान बड़ा बाईपास
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