बरेली। तीन बार संसद में पहुंचाने वाली आंवला सीट इस बार समाजवादी पार्टी की ओर से बसपा को भेंट कर दिए जाने से आहत सर्वराज सिंह ने दूसरा रास्ता पकड़ लिया। शनिवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी को अलविदा कहते हुए कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। नई दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें कांग्रेस में शामिल कराया। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवार बनाने की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उन्हें टिकट मिलना पक्का माना जा रहा है। आंवला सीट की चुनावी तस्वीर में सर्वराज की एंट्री से यहां जबर्दस्त मुकाबला होना भी तय हो गया है।
गठबंधन में आंवला सीट बसपा को दिए जाने के बाद से ही सर्वराज सिंह विकल्प तलाश कर रहे थे। आंवला सीट पर एक बार वह नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड से चुनाव लड़ चुके हैं, लिहाजा शुरुआती दौर में चर्चा उठी थी कि वह इस बार भी टिकट के लिए नीतीश कुमार के संपर्क में हैं, लेकिन जदयू चूंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हैं लिहाजा जल्द ही इस चर्चा पर विराम लग गया। कई दिनों से वह दिल्ली में डेरा डाले हुए थे और कांग्रेस नेताओं के संपर्क में थे। इसको लेकर लगातार अटकलें लग रही थीं। शनिवार को कांग्रेस में उनके शामिल होते ही साफ हो गया कि आंवला सीट के जिस तीसरे दावेदार को लेकर अभी तक कयास लग रहे थे, वह सर्वराज सिंह होंगे। यहां मुकाबला अब धर्मेंद्र कश्यप, रुचिवीरा और सर्वराज सिंह के बीच होना तय माना जा रहा है।
सपा ने नाइंसाफी की मेरे साथ, कैसे बर्दाश्त करता
दिल्ली से टेलीफोन पर हुई बातचीत में कुंवर सर्वराज सिंह ने बताया कि आंवला क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का वजूद उनकी वजह से ही बना था। आंवला सपा की मजबूत सीट थी जिसे उसने बंटवारे में बसपा को दे दिया। यह उनके साथ नाइंसाफी थी, जिसे वह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते। सर्वराज सिंह ने कहा कि जब नेताजी ने सही बात कहने पर उन्हें एक बार सपा से निकाल दिया था, उसके बाद दोबारा सपा में लौटना उनकी भूल थी। वह कांग्रेस में अपने घर जैसा महसूस कर रहे हैं। कुंवर सर्वराज सिंह सन्हां से दो बार विधायक और आंवला से तीन बार सांसद रह चुके हैं। वह 1995 में सपा से पहली बार आंवला से चुनाव लड़कर सांसद बने थे। एक बार जनता दल यू से भी चुनाव लड़कर जीत चुके हैं।