लालफाटक ब्रिज : सरकार को फिर लगाएंगे करोड़ों की चपत
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बरेली। घिसटते काम की वजह से लालफाटक ओवरब्रिज के एस्टीमेट के भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सेतु निगम और प्रशासन ने आधी-अधूरी तैयारियों के बीच इस पुल का निर्माण शुरू कराया था। अब कैंट की जमीन न मिलने और रेलवे क्रासिंग पर निर्माण लटकने से यह प्रोजेक्ट लगातार पिछड़ रहा है। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण पूरा होने में जितनी देरी होगी, निर्माण की लागत उतना ही बढ़ जाएगी। लेटलतीफी की ही वजह से आईवीआरआई प्रोजेक्ट के एस्टीमेट में भी करोड़ों बढ़ाने की तैयारी चल रही है। संशोधित बजट का प्रस्ताव काफी पहले ही शासन को भेजा जा चुका है।
लाल फाटक क्रॉसिंग पर 955 मीटर ओवरब्रिज का निर्माण नवंबर 2017 में शुरू किया गया था। करीब डेढ़ साल बाद भी इस पुल के लिए अब तक न तो कैंट बोर्ड की जमीन के लिए एनओसी मिली है और न ही रेलवे अधिकारियों ने दिल्ली-लखनऊ और बरेली-कासगंज क्रासिंग पर पुल के अपने हिस्से का निर्माण शुरू कराया है। अभी सिर्फ बदायूं की दिशा में पुल का 40 फीसदी काम ही कराया गया है। बाकी काम पूरा करने के लिए कैंट बोर्ड और रेलवे को भी तेजी दिखानी है, लेकिन अभी ऐसा दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में सेतु निगम के अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि पुल के काम में ऐसी ही देरी हुई तो निर्माण सामग्री के रेट बढ़ेंगे और पुरानी लागत पर काम पूरा करना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि आईवीआरआई प्रोजेक्ट पहले 38.23 करोड़ में पूरा होना था, अब उसका 54.67 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया है। यही हाल लालफाटक का हुआ तो सरकार को करोड़ों की चपत लगना तय है।
यह सही है कि कैंट की जमीन मिलने में देरी हो रही है। रेलवे अधिकारियों ने भी काम नहीं शुरू कराया है। इससे पुल निर्माण में देरी हो रही है। फिर भी कोशिश की जा रही है कि रिवाइज एस्टीमेट की जरूरत न पड़े। - वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम (इकाई-दो)