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समुद्र का बढ़ता जलस्तर दुनिया के लिए खतरे की घंटी

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बरेली। बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग में ‘इंवायरमेंटल इशूज एंड चैलेंजेस’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आखिरी दिन म्यांमार और अफगानिस्तान से आए विशेषज्ञों ने मौजूदा हालातों में पूरी दुनिया के सामने आ रही पर्यावरणीय समस्याओं पर चिंता जताई। म्यांमार की येजिन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर मयात सू मून ने समुद्र के बढ़ते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि समुद्र पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए खाद्य पदार्थों की अभी से ही सुरक्षा करनी चाहिए। वहीं अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्रालय के डॉ. अकरम नाशरी ने कहा कि उनके देश में युद्ध से आबोहवा ही जहरीली हो गई है। अगर दुनिया में युद्ध होते हैं तो मानव जाति इसके प्रभाव से नष्ट होने की कगार पर पहुंच जाएगी।
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डॉ. मयात सू मून ने कहा कि एनर्जी इंडस्ट्री बढ़ने से मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार दुनिया में 70 फीसदी जंगलों में 48 फीसदी ही बचे हैं। पर्यावरण असंतुलन से उनके देश में 1887 से 2005 के बीच तूफान से 1248 मौतें हुईं। 64 हजार लोग प्रभावित हुए।
डॉ. अकरम ने कहा कि उनके देश में भी युद्ध से प्रदूषण बढ़ा है। वहां पीने के पानी की दिक्कतें हो रही हैं। भारत की मदद से उनके देश में बांध बन रहा है, जिससे पीने के पानी की समस्या खत्म होगी। मुख्य अतिथि डॉ. डीके गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण से जीव जंतु और मानव जाति के लिए खतरा बढ़ रहा है। अगर अभी नहीं सुधरे तो पीने के पानी को तरसेंगे। बीएचयू से आए शोध छात्र विशाल त्रिपाठी ने हेक्जाक्लोरोसाइकिल केमिकल के बारे में बताया। कहा कि इससे पौधों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बरेली कॉलेज पर्यावरण विज्ञान की छात्रा ने सृति शर्मा ने रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि प्रदूषण से कैंसर की बीमारी तेजी से फैल रही है। पर्यावरण विभाग के हेड डॉ. एपी सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। समापन के मौके पर इंवायरमेंट कंजर्वेशन अवार्ड डॉ. जीवन सिंह बाबा भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी और डॉ. आनंद गुप्ता इंस्टीट्यूट आफ सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन देहरादून को दिया गया। बेस्ट एकेडमी नेशन अवार्ड डॉ. प्रियंका सागर कुमाऊं यूनिवर्सिटी अल्मोड़ा और डॉ. केपी सिंह को दिया गया। यंग साइंटिस्ट अवार्ड डॉ. समीर चंद्रा प्लांट साइंस रुहेलखंड विश्वविद्यालय को दिया गया। बेस्ट रिसर्च अवार्ड रवि कुमार गंगवार को दिया गया।
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