एलएलबी, बीबीए, बीसीए, एलएलएम समेत विश्वविद्यालय कैंपस में चल रहे प्रोफेशनल कोर्स के परीक्षा फार्म में तमाम गड़बड़ियों पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कुछ छात्रनेताओं के नेतृत्व में इकट्ठे हुए छात्रों ने विश्वविद्यालय कैंपस में पूरे दिन हंगामा किया। एबीवीपी और सछास नेताओं ने परीक्षा नियंत्रक का घेराव कर उन पर गड़बड़ियां कराने का आरोप लगाते हुए फॉर्म भरने की तिथि बढ़ाने की मांग की। परीक्षा नियंत्रक के आश्वासन के बाद छात्र शांत हुए।
छात्रों के हंगामे के बाद अब करीब एक सप्ताह के लिए फॉर्म भरने की तिथि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में बुधवार को पूरे दिन छात्रों की भीड़ रही। दरअसल, सैकड़ों छात्रों का डाटा गायब है और उनके माता-पिता का नाम गलत आया है। परीक्षा नियंत्रक संजीव सिंह ने बताया कि छात्रों ने समस्या से अवगत कराया है। फार्म की तिथि करीब पांच दिन और बढ़ाई जाएगी। गुरुवार को इसके आदेश जारी किए जाएंगे।
विकास शुल्क के नाम पर वसूली बंद हो
एबीवीपी ने परीक्षा फार्म की गड़बड़ियां दूर कराने और तिथि बढ़वाने के साथ कॉलेजों में वसूली बंद कराने की भी मांग उठाई। कहा कि व्यक्तिगत छात्रों से जो मनमाना विकास शुल्क वसूला जा रहा है, वह बंद हो। बीस नवंबर तक फार्म भरे जाएं। प्राइवेट परीक्षा केंद्रों का निर्धारण विश्वविद्यालय करे। कॉलेजों में होने वाली अतिरिक्त वसूली बंद हो। इस मौके पर एबीवीपी के जिला संगठन मंत्री राहुल चौहान, गौरव यादव, प्रशांत, दीपक आदि मौजूद रहे।
परीक्षा नियंत्रक ने छात्रनेताओं से पूछा तुम कौन..
परीक्षा नियंत्रक ने भी एबीवीपी नेताओं पर धौंस जमानी चाही। छात्रनेताओं के पहुंचते ही वह समस्या सुनने के बजाए उल्टा हड़काने लगे। एक-एक करके पूछा तुम कौन। जब छात्रनेताओं ने उल्टा जवाब दिया तभी वह समस्याएं सुनने लगे।
विश्वविद्यालय कैंपस
के फार्म ही नहीं खुले
विश्वविद्यालय कैंपस में संचालित बीटेक, एमबीए व अन्य कोर्स के परीक्षा फॉर्म ही वेबसाइट पर नहीं खुले। सछास के नेता गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुंचे छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक का घेराव कर पूछा कि एजेंसी बदलने के बाद भी कैंपस के छात्रों के डाटा में गड़बड़ी कैसे हो गई। छात्रों ने कहा कि ज्यादातर छात्र फार्म ही नहीं भर सके। फार्मेसी के फार्म भी नहीं खुले। छात्रों ने कहा कि कमीशनखोरी के कारण एजेंसी बदली गई। अब छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। छात्रों ने डाटा सही कराने और फार्म भरने की तिथि बढ़ाने की मांग की। इस दौरान आदर्श, प्रशांत, मोहम्मद साकिब, देवेश आदि मौजूद रहे।
बिना टेंडर बदल दी एजेंसी
परीक्षा फार्म भरवाने के लिए इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने एजेंसी बदल दी। बिना टेंडर के ही एजेंसी चुन ली गई। सूत्रों की मानें तो वित्त विभाग ने एजेंसी बदलने के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला। कुछ अधिकारियों ने अंदरखाने एजेंसी बदल ली। यह भी आरोप है कि कमीशनखोरी के चलते एजेंसी बदली गई। एजेंसी को कार्य का अनुभव नहीं है जिस कारण इतनी गड़बड़ियां हो रही हैं।