पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बीते दिनों हुई भारी बारिश से रामगंगा और बहगुल नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। हालांकि अभी बरेली में दूर-दूर तक बाढ़ का खतरा नहीं है। गर्मी के दिनों में दोनों नदियां सूखने के कगार पर पहुंच चुकी थीं। शनिवार को रामगंगा का जलस्तर 158.520 और बहगुल का 205.250 क्यूसेक था, जो कि खतरे के निशान से अभी काफी नीचे है।
बरेली में वर्ष 2010 में भयंकर बाढ़ आई थी। इससे दो सौ गांव प्रभावित हुए थे। इस बार भी मौसम विशेषज्ञ भारी बारिश का अनुमान लगा रहे हैं। कालागढ़ डैम में पानी की मात्रा बढ़ने से उसे रामगंगा में छोड़ा जाता है। वर्तमान में कालागढ़ डैम में 308.570 मीटर पानी है, जो खतरे के निशान (365.300 मीटर) से 67 मीटर नीचे है। रामगंगा का जलस्तर पिछले एक सप्ताह में बढ़कर 158.520 मीटर हो गया है। हालांकि रामगंगा खतरे के निशान को तब पार करती है जब यहां पानी 163.070 मीटर से अधिक हो जाता है।
धौरा डैम का जलस्तर 211.01 मीटर है। ये डैम जब खतरे के निशान से ऊपर होता है तो डैम का पानी बहगुल नदी में छोड़ा जाता है। धौरा डैम के खतरे का निशान 216.40 मीटरहै। बहगुल नदी के जलस्तर का खतरे का निशान 208.33 क्यूसेक है, जबकि वर्तमान में इस नदी में 205.250 क्यूसेक पानी बह रहा है। नानक सागर बांध में भी बारिश होने के बाद पानी की मात्रा बढ़कर 210.10 मीटर तक पहुंच गई है। इस डैम के खतरे का निशान 215.19 मीटर है।
24 घंटे का कंट्रोल रूम खुला
एक्सईएन मुकेश कुमार ने बताया कि बाढ़ खंड ने जिला मुख्यालय पर 24 घंटे का कंट्रोल रूम खोल दिया है। कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0581-25116664 पर कोई भी बाढ़ से संबंधित सूचना दे सकता है।
कालागढ़ डैम खतरे के निशान से 67 मीटर नीचे
बरेली। कालागढ़ से डैम से ही रामगंगा में पानी आने से मुरादाबाद और बरेली में बाढ़ आती है। पहाड़ी क्षेत्रों और आसपास के इलाके में बरसात कम होने की वजह से अभी कालागढ़ डैम से पानी छोड़े जाने के कोई आसार नहीं है। एडीएम(वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार ने बताया कि कालागढ़ डैम खतरे का निशान 365 मीटर पर है। शुक्रवार को डैम में पानी 298 मीटर था। उनकी डाम के अधिकारियों से बात भी हुई। उनका कहना है कि अभी तो डैम में पानी इकट्ठा होना शुरू हुआ है।
कम्यूनिकेशन प्लान बनेगा
बरेली। एडीएम(वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार ने डीएम की तरफ से तहसीलों में बाढ़ से निपटने के लिए कंट्रोल रूम खोलने को आदेश जारी कर दिए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन के पास अपनी नाव तो नहीं है। किराए की नाव के लिए रामगंगा के किनारे के नाविकों के मोबाइल नंबर जुटा लिए गए हैं। निजी गोताखोरों की सूची भी तैयार कर ली गई है। पीएससी के गोताखोर, नाव और मोटर वोट भी बाढ़ की स्थिति में मददगार साबित होती हैं। 120 ग्राम पंचायतों में बाढ़ से बचाव को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।