फरीदपुर। कस्बे में 50 लाख रुपये का बजट खपाने के बाद भी जगह-जगह अंधेरा है। अव्यवस्थाओं से स्ट्रीट लाइटें खराब हैं तो कहीं स्ट्रीट लाइट ही गायब हो गए हैं। खराब हुए स्ट्रीट लाइटों को उतार कर अभी तक ठीक नहीं कराया जा सका है। इससे कई मार्गों से गुजरने वाले लोगों को रात में परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं।
नगर पालिका परिषद के सभासद देवेंद्र सिंह टोनी ने बताया कि पालिका द्वारा कस्बे में प्रकाश व्यवस्था के लिए विगत कई वर्ष पूर्व मेन रोड और सार्वजनिक रास्तों पर पोल लगवा कर स्ट्रीट लाइटें लगवाई गई थीं। एक वर्ष में 50 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके रखरखाव और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ रखने की व्यवस्था अब चौपट हो गई है। इनमें से 30% खंभों पर लाइट ही नहीं है। उसमें लगाए गए एलईडी भी उतार लिए गए हैं। उन खंभों पर वर्षों बाद भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगवाए गए हैं।
सभासद संजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रकाश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए लगाए गए बजट में बंदरबांट कर लिया गया है। इसलिए एक वर्ष से यह समस्या बरकरार है। उनका कहना है कि यदि बजट से स्ट्रीट लाइट में 50% भी खर्च किया जाए। तब भी कस्बे में रोशनी की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
कस्बे में 2500 खंभे, 700 निष्क्रिय
सभासदों के अनुसार, कस्बे में 2500 खंभे हैं। इसमें करीब 300 निष्क्रिय हैं, जिसमें कुछ खराब है तो कुछ में लगे एलईडी ही निकाल लिए गए हैं। लोगों ने कहा कि यह समस्या कस्बे में एक साल से है। लोगों ने इस पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गौसगंज मार्ग से आश्रम तक स्ट्रीट लाइट के खराब रहने के लिए चलते अंधेरा रहता है। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने में डर लगता है। संवाद
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स्ट्रीट लाइटें क्यों नहीं लगाई गई, करेंगे जांच : ईओ
नगर पालिका के ईओ पुनित कुमार ने बताया कि कस्बे में उतारी गई स्ट्रीट लाइटें क्यों नहीं लगाई गई। इसके लिए जांच कराएंगे। साथ ही प्रकाश व्यवस्था पर कितनी राशि खर्च की गई है। वह जानकारी करके ही बता सकते हैं। उनके समय में प्रकाश व्यवस्था पर कोई खर्च नहीं किया गया है। उससे पहले का आंकड़ा देखने के लिए उन्हें समय चाहिए होगा।