बरेली। केंद्र सरकार ने युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के किए विभिन्न योजनाएं शुरू कराईं हैं। इनमें स्टार्टअप, स्टैंडअप और मुद्रा योजना प्रमुख है। इन योजनाओं में बैंक से सस्ती दरों पर लोन दिया जाना है मगर बैंक प्रबंधन की मनमानी के चलते यह योजनाएं कारगर साबित नहीं हो पा रहीं हैं। तमाम लाभार्थी स्कीम का लाभ लेने को बैंक के चक्कर ही लगाते रहते हैं और आखिर में थककर दलालों की शरण लेते हैं तभी उनका काम हो पाता है। इस भ्रष्ट सिस्टम की शिकार हुई मढ़ीनाथ की कल्पना भारद्वाज समेत कई महिलाएं कई महीनों से ‘स्टैंडअप’ के लिए जूझ रहीं हैं।
अधिकतर बैंक सरकारी योजनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अधिकांश बैंक शाखाओं का लक्ष्य दलालों के माध्यम से पूरा हो रहा है। बैंकों में बिचौलिये के बिना फाइल ही आगे नहीं बढ़ पाती। सरकार और वित्त मंत्रालय ने काम नहीं होने पर पोर्टल पर शिकायत करने की सुविधा दे रही है, लेकिन पोर्टल पर की गई शिकायतों के भ्रामक उत्तर देकर निपटा दिया जाता है, इससे लोगों को स्कीम का फायदा समय से नहीं मिल पाता है। इस भ्रष्ट सिस्टम की एक शिकार मढ़ीनाथ निवासी कल्पना भारद्वाज भी हैं जिन्होंने ‘स्टैंडअप’ से प्रेरित होकर पिज्जा कारोबार की योजना बनाई थी और बड़ौदा बैंक की करगैना शाखा में आवेदन किया था। वे पिछले छह माह से 13.40 लाख रुपये के लोन के लिए दौड़ रहीं हैं। शाखा प्रबंधक मयंक सांगवाल ने किसी तरह फाइल आगे बढ़ाई तो जीएसपीएस (गर्वमेंट स्कीम प्रोसेगिंग सेल) ने फाइल स्वीकृत कर दी, लेकिन मैनेजर ने इसके बावजूद लाभार्थी के खाते में वांछित लोन राशि ट्रांसफर नहीं की, जबकि फाइल एक महीने से ब्रांच में पड़ी है। पीड़ित पक्ष ने क्षेत्रीय प्रबंधक समेत विभिन्न स्तरों पर गुहार लगाई है। बताया जाता है कि इस ब्रांच ने ‘स्टैंडअप’ योजना में एक भी लोन नहीं किया है।
‘स्टैंडअप’ योजना
इस योजना में महिलाएं अपना कारोबार शुरू करने के लिए दस लाख से दो करोड़ रुपये तक लोन बैंकों से ले सकती हैं। लेकिन जिस तरह का सिस्टम बना हुआ है, उसे देखते हुए सीधे बैंक में संपर्क करने पर शायद आपको लोन नहीं मिल पाएगा, इसके लिए दलालों से संपर्क करना जरूरी बना दिया गया है।
‘स्टैंडअप’ समेत सभी सरकारी ऋण योजनाओं को लागू कराने को बड़ौदा बैंक प्रतिबद्ध है। करगैना शाखा बरेली मामले में छानबीन कर सख्त कार्रवाई करेंगे।