बरेली। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. को नगर निगम में चार्ज संभाले 15 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं कि मेयर उमेश गौतम से एक के बाद एक उनकी नाइत्तफाकियां सामने आनी शुरू हो गई हैं। पहले नगर आयुक्त की ओर से पार्षदों और आम जनता से मिलने के लिए लागू किए गए पर्ची सिस्टम पर मेयर ने असहमति जताई थी, अब शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 10 करोड़ के बजट का इंतजाम करने का उनका सुझाव भी खारिज कर दिया है। हालांकि मेयर के फाइल पर दस्तखत करने से इंकार करने के बावजूद नगर आयुक्त ने शनिवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव रखने की बात कही है।
अलग-अलग मुद्दों पर नगर आयुक्त और मेयर के बीच ठनती नजर आ रही है। पर्ची सिस्टम के बाद सफाई के मुद्दे पर मेयर ने नगर आयुक्त के सुझाव पर असहमति जताई है। दरअसल नगर आयुक्त का मानना है कि डोर-टू-डोर एजेंसियां और सफाई कर्मचारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। नगर आयुक्त का सुझाव है कि कूड़ा कलेक्शन का इंतजाम करने के लिए बजट में दस करोड़ रुपये की व्यवस्था की जाए, लेकिन मेयर बजट में शून्य किए जा चुके कूड़ा कलेक्शन के खर्च को दस करोड़ करने को तैयार नहीं है। शनिवार को नगर आयुक्त के निर्देश पर पर्यावरण अभियंता एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी जब उनके पास इस प्रस्ताव की फाइल लेकर पहुंचे तो उन्होंने उस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।
बता दें कि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के चार्ज संभालने के बाद निगम के अफसर और मेयर-पार्षद धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों नगर आयुक्त ने पार्षदों के लिए उनसे मुलाकात के लिए पर्ची भेजने की व्यवस्था लागू की तो पार्षदों ने काफी विरोध किया था। पार्षदों की शिकायत पर मेयर ने भी नगर आयुक्त की इस व्यवस्था पर असहमति जताई थी। हालांकि इसी बीच नगर आयुक्त के बैठक के सिलसिले में बाहर चले जाने से यह मामला ठंडा पड़ गया। शनिवार को नगर आयुक्त लौटे तो उन्होंने सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए अधिकारियों से मंथन किया। इसके बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी का जिम्मा संभाल रहे पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने कूड़ा कलेक्शन के लिए दस करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया और मंजूरी के लिए मेयर के पास पहुंचे। मगर उन्होंने मंजूरी नहीं दी।
सपा शासन में उठे थे कूड़ा कलेक्शन पर सवाल
पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में कूड़ा कलेक्शन पर काफी सवाल उठे थे। उस समय कूड़ा कलेक्शन निजी एजेंसियों के हाथ में था और वजन के हिसाब से उन्हें भुगतान करना होता था। शिकायत के बाद सामने आया कि भुगतान की दर लखनऊ से भी ज्यादा है। इसके बाद बोर्ड मीटिंग में भी सवाल उठे और दरें कम की गईं। बता दें कि उमेश गौतम के मेयर बनने के बाद यह पहला मामला है जब किसी मुद्दे पर मेयर और नगर आयुक्त में मतभेद सामने आए हैं। पिछले दिनों नगर निगम में राजेश श्रीवास्तव नगर आयुक्त थे, लेकिन उनके और मेयर के बीच कभी किसी मामले को लेकर विरोधाभास नहीं रहा। किसी का भी प्रस्ताव रहा हो, दोनों ही सहमत रहे।
निजी एजेंसियों को काम देकर शून्य किया खर्च
सपा सरकार के दौरान उठे सवालों से सबक लेते हुए मेयर उमेश गौतम ने कूड़ा कलेक्शन का खर्च शून्य कर दिया। उन्होंने निजी एजेंसियों को डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का काम दे दिया और यूजर चार्ज वसूलने की जिम्मेदारी भी उन्हीं को दे दी।
शहर में सफाई व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। डोर-टू-डोर एजेंसियां पूरा काम नहीं कर पा रही हैं। इसके लिए बजट में दस करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। यह प्रस्ताव शनिवार को नगर निगम बोर्ड के समक्ष रखेंगे। - सैमुअल पॉल एन., नगर आयुक्त
डोर-टू-डोर एजेंसियों से कूड़ा कलेक्शन का काम कराया जा रहा है, इसलिए इसका बजट शून्य किया गया है। पिछली निगम सरकार में कूड़ा कलेक्शन के भुगतान पर सवाल उठे थे। इस खर्च को बढ़ाने के बजाय निगरानी पर जोर देना चाहिए। - उमेश गौतम, मेयर
बोर्ड मीटिंग आज, पेश होगा 412 करोड़ का बजट
बरेली। नगर निगम कार्यकारिणी की मंजूरी के बाद आज शनिवार को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 412 करोड़ रुपये का बजट मंजूरी के लिए बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। कार्यकारिणी की बैठक में 18 फरवरी को इस बजट को मंजूरी भी मिल चुकी है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बजट में 366 करोड़ रुपये व्यय और 306 करोड़ रुपये आय का प्रावधान किया गया है। यह बजट पिछले साल की अपेक्षा करीब 34 करोड़ रुपये अधिक है।