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आईवीआरआई ओवरब्रिज की खबरों के साथ

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सेफ्टी ऑडिट टीम की सिफारिशों पर अब तक नहीं हुआ अमल
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दिसंबर में लखनऊ से आई सेफ्टी ऑडिट टीम ने आईवीआरआई और लालफाटक ओवरब्रिज के निर्माण की जांच की थी। तीन गुटकों को गलत बताने के बाद इस टीम ने लाल फाटक पर सर्विस लेन न बनने पर काफी नाराजगी जताई थी। सर्विस लेन न होने से यहां हुए हादसों में नौ लोगों की मौत भी हो चुकी है। मगर इसके बावजूद लालफाटक पर अब तक सर्विस लेन का निर्माण नहीं हुआ है। पहले जो सर्विस लेन बनाई गई थी, वह भी क्षतिग्रस्त हो रही है। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि सर्विस लेन बनाने के लिए बिजली लाइन के खंभे और ट्रांसफार्मरों को शिफ्ट होना है जबकि पावर कारपोरेशन के अधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे सर्विस लेन का काम भी अधूरा पड़ा है। इसके अलावा सेफ्टी ऑडिट टीम ने निर्माण कार्य के पास सेफ्टी रिबन, सेफ्टी नेट सहित सुरक्षा के लिहाज से दूसरे काम भी कराने थे। सेफ्टी ऑडिट टीम की रिपोर्ट के बावजूद इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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नवाब सिंह की गलतियों की अनदेखी पड़ी भारी
सेतु निगम के दो बड़े और महत्वपूर्ण आईवीआरआई और लालफाटक फ्लाईओवर के प्रोजेक्ट पहले उप परियोजना प्रबंधक नवाब सिंह देख रहे थे। दोनों परियोजनाओं को लेकर तमाम गड़बड़ियां लगातार सामने आ रही थी। लालफाटक पर नाले का घटिया निर्माण कराने, सर्विस लेन की रकम दबाने, मजदूरों को सुरक्षा के लिए हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, जूते न देने सहित तमाम घोटाले होते रहे लेकिन मुख्य परियोजना प्रबंधक आरके सिंह इन गंभीर खामियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। न कोई निर्देश दिए न ऊपर रिपोर्ट भेजी। इसे एमडी उत्तम सिंह गहलौत ने गंभीरता से लिया। जब सेतु निगम के स्टाफ ने नवाब सिंह के बर्ताव के खिलाफ उनके साथ काम करने से इंकार कर दिया था, तब भी आरके सिंह नवाब सिंह के समर्थन में खड़े रहे।
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रेलवे अधिकारियों पर ठीकरा फोड़कर की थी बचाव की कोशिश
सेतु निगम के इंजीनियरों ने आईवीआरआई ओवरब्रिज के बीम को लकड़ी के गुटकों के सहारे रोककर पहले सुरक्षा मानकों की अनदेखी की, लेकिन बाद में जब वह इस मामले में जांच में फंसे तो डीपीएम नवाब सिंह के इशारे पर सेफ्टी ऑडिट टीम के पहुंचने से पहले ही उन्हें रातोंरात हटा दिया गया। जब टीम मौके पर जांच करने पहुंची तो नवाब सिंह ने बचाव करने के लिए पास ही क्रासिंग पर रेलवे के हिस्से में बन रहे पुल के बीम को दिखाया और यह जताने की कोशिश की कि गलती रेलवे के अधिकारियों ने की है। लाख कोशिश के बावजूद वह सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सके।
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