बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले की फाइल एक बार फिर दब गई है। इसमें केवल चकबंदी के दो कर्मचारियों पर ही विभागीय कार्रवाई हुई है। घोटाले में दोषी पाए गए कलक्ट्रेट और नवाबगंज तहसील के स्टाफ पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
नवाबगंज के गांव अटंगा चांदपुर के अबरार हुसैन की डंडिया नजमुल निशा में करीब सौ बीघा जमीन को खतौनी में जालसाजी करके उसे तारिक नाम के एक शख्स की मिल्कियत दिखा दी गई थी। जमीन का अमल दरामद भी करा दिया गया। शिकायत पर तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने तत्कालीन एसीएम फर्स्ट जलालुद्दीन से जांच कराई। जांच में सामने आया था कि वर्ष 2005 में चकबंदी कोर्ट में अबरार की जमीन की खतौनी पर हापुड़ के तारिक का नाम दर्ज कर तहसील के खतौनी रिकॉर्ड में दाखिल खारिज कर दिया गया। वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रमाकांत शुक्ला ने इसे खारिज करने के आदेश दिए तो आरोपियों ने वर्ष 2016 में व्हाइटनर लगाकर उनका आदेश भी पलट दिया। एडीएम सिटी की जांच में आखिरकार तारिक के बेटे फिरोज ने जालसाजी का भंडाफोड़ कर ही दिया। डीएम के आदेश पर मामले में दो खरीदारों के साथ राजस्व निरीक्षक और पांच सरकारी कर्मचारियों पर एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन इन कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई का मामला फिर ठंडा हो गया है। घोटाले में सिर्फ चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना व मकीरूद्दीन के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। जबकि मामले में फंसे राजस्व अभिलेखागार के नकल नवीस रकिमुल हसनैन, परगना अरेंजर राम मनोहर सक्सेना और नवाबगंज तहसील के राजस्व निरीक्षक चौखे सिंह व डाक रनर पर विभागीय कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। जबकि एसीएम फर्स्ट मदन कुमार ने रिकॉर्ड रूम के दोनों कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। इसके अलावा एसडीएम नवाबगंज ने भी आख्या दे दी है।