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सवा महीने में एक फीसदी अनाज सरकारी गोदामों में

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बरेली। धान की सरकारी खरीद पर इस बार भी दलालों का कब्जा है। सिस्टम की लापरवाही और बदइंतजामी के बीच सेंटरों पर धान किसानों को सुनियोजित तरीके से परेशान किया जा रहा है, ताकि वे बिचौलियों के हाथों अपना धान औने-पौने रेट पर बेचने के लिए तैयार हो जाए। यही वजह है कि खरीद शुरू होने के करीब सवा माह बाद भी सरकारी गोदामों में सिर्फ एक प्रतिशत चावल की सप्लाई हो सकी है हालांकि अफसर दिवाली बाद सेंटरों पर किसानों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं।
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जिला प्रशासन को इस साल 1.56 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है। इसके लिए 1750 रुपये प्रति क्ंिवटल का रेट भी निर्धारित है, जबकि खरीद में लगीं सरकारी एजेंसियों के 69 सेंटरों का हाल यह है कि वहां धान की खरीद ठप है। सरकारी रिकार्ड की मानें तो अब तक केवल इस टारगेट का केवल एक प्रतिशत ही धान खरीदा जा सका है। इसे लेकर बड़ी दिक्कत यह है कि सरकारी केंद्रों पर खरीद की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा धान में नमी और उसे टूटा बताकर उसे खरीद करने में टालमटोल की जा रही है। खरीद केंद्रों के स्टाफ, आढ़तियों और दलालों की मिलीभगत से किसानों का शोषण हो रहा है। बताते हैं कि मंडी में किसानों से 14-15 सौ रुपये क्विंटल धान खरीदा जा रहा है। किसान भी परेशान होकर मजबूरी में दलालों के आगे घुटने टेक रहे हैं। अधिकारी यह कहकर बचाव कर रहे हैं कि अभी धान में ज्यादा नमी है। इसके अलावा किसान आमतौर पर दिवाली बाद ही धान बेचता है। इसलिए अब एकाएक किसानों की भीड़ के साथ खरीद भी बढ़ेगी।

अभी केवल 42 सौ किसानों के ही हुए रजिस्ट्रेशन
सरकारी केंद्रों पर कोई फर्जी किसान धान की बिक्री न कर सके, इसके लिए किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होनी थी। यह काम अक्तूबर तक हो जाना चाहिए था लेकिन अब तक सिर्फ 42 सौ किसानों के ही पंजीकरण ही प्रशासन कर सका है। जिला खाद्य एवं विपणन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण का ग्राफ कम से कम दोगुना होगा।
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मंडी में सरकारी सेंटर पर नहीं थे पूरे इंतजाम
आंवला मंडी में खरीद एजेंसी यूपी स्टेट एग्रो के पास नमी वाला धान सुखाने के लिए पॉवर फैन ही नहीं थे, जबकि इस फैन के न होने से बिक्री के लिए आने वाले नम धान को सुखाने की दिक्कत के साथ ही उसका खरपतवार भी नहीं साफ हो पा रहा था। मंडी सचिव की तरफ से एजेंसी के मंडल कार्यालय को भी यह रिपोर्ट भेजी गई, हालांकि अब इस फैन के उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है।
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सरकारी केंद्रों पर अभी खरीद कम है। त्योहार बीत गए हैं और धान खरीद बढ़ेगी। किसानों के काफी रजिस्ट्रेशन भी हो चुके हैं। - सुशील भारती, डिप्टी आरएमओ
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