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अरिल नदी किनारे के गांवों से फैला फैल्सीपेरम मलेरिया

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अरिल नदी के किनारे के गांवों में पल रहे मच्छरों ने फैल्सीपेरम मलेरिया को जन्म दिया। मलेरिया विभाग कागजों पर एंटी लार्वा का छिड़काव कराता रहा। इस लापरवाही का ही नतीजा है कि रामनगर, बिशारतगंज, आंवला, भमोरा के अरिल नदी किनारे बसे गांवों में फैल्सीपेरम मलेरिया बेकाबू हो गया। बुखार से सबसे ज्यादा मौतें भी इन्हीं गांवों में हुई हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ 24 लोगों की मौत की पुष्टि कर रहा है। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम के प्रभारी डॉ. अब्बास मीशान के मुताबिक, अब इन गांवों को केंद्र में रखकर मलेरिया कंट्रोल प्रोग्राम की रणनीति तैयार की गई है।
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विभाग की मानें तो फैल्सीपेरम मलेरिया के संक्रमण की शुरुआत बदायूं से हुई है। बरेली में बार्डर एरिया के गांवों के प्रभावित होने के साथ ही मच्छरों के पनपने के लिए अरिल नदी की तराई का इलाका मुफीद साबित हुआ है। यही वजह है कि इन गांवों में जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के मरीज बहुतायत में मिले हैं। रामनगर में अरिल नदी की तराई के गांव सुकटिया में बुखार से दो लोगों की मौत हो चुकी हैं। दौलतपुर, बड़ा थानपुर, धर्मपुरा, अरिल में एक-एक मौत हो चुकी हैं। बिहारीपुर, गुलड़िया, मऊ चंदपुर में तमाम लोग बुखार से तप रहे हैं। भमोरा के गांव सेंधा, इस्लामनगर, गनीपुर, मलगांव, कुंडा सेठी, सेंधा, मोतीपुर में फैल्सीपेरम मलेरिया के मरीज मिले हैं। आंवला के लोहारी, मेहमूदपुर, जलीपुर, बाड़ी खेड़ा, रंपुरा में भी मलेरिया फैला हुआ है।
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