‘देवा ओ देवा, गणपति देवा, अगली बरस तू जल्दी आना, गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ के जयकारों से शहर गूंजता रहा। मौका था, श्रीगणेश चतुर्थी पर मूर्ति विसर्जन का। हर कोई गणेश की भक्ति में डूबा नजर आ रहा था। देर रात तक रामगंगा पहुंचकर प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला जारी रहा।
बिहारीपुर दरगइया गली से निकाली गई विसर्जन शोभायात्रा का शुभारंभ पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन और मेयर उमेश गौतम ने विधि विधान से पूजन और आरती करके किया। इसमें शामिल झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। हवा में बिखरते अबीर, गुलाल और आतिशबाजी का नजारा बरबस ही मन मोह रहा था। समिति ने 51 छोटी प्रतिमा समेत एक मुख्य बड़ी प्रतिमा का विसर्जन किया। यहां विकास मेहरोत्रा, अमित अरोड़ा आदि रहे।
मराठा बुलियन एसोसिएशन की शोभायात्रा की शुरुआत घी मंडी से हुई। किला फाटक होते हुए विसर्जन यात्रा रामगंगा पहुंची। महाराष्ट्र से आए बैंडबाजे की धुन पर श्रद्धालु नाचते रहे। यात्रा में करीब 50 से ज्यादा स्थानों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। गणेश की विशाल प्रतिमाओं के साथ घरों से विसर्जन के लिए रामगंगा जाती हुई छोटी प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र रहीं।
जगह-जगह हुआ स्वागत
राजेंद्रनगर स्थित गुलमोहर पार्क कॉलोनी में स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन धूमधाम से हुआ। इससे पहले ब्रजेश पांडेय व अन्य ने विधि विधान से हवन-पूजन किया। भगवान को 151 लड्डुओं का भोग लगाया गया। पारंपरिक मार्गों से शोभायात्रा निकालकर रामगंगा में गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया। रोहली टोला स्थित प्राचीन माहौर वैश्य नवदुर्गा मंदिर में चल रहे गणेश महोत्सव का प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हुआ। जगह-जगह पुष्पवर्षा से विसर्जन यात्रा का स्वागत किया गया।
क्यों करते हैं विसर्जन
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा के मुताबिक वेद व्यास ने महाभारत कथा गणेश जी को लगातार दस दिन तक सुनाई थी। जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था। दस दिन बाद जब वेद व्यास ने आंखें खोली तो पाया कि अथक मेहनत से गणेश का तापमान बढ़ गया है। तुरंत वेद व्यास ने उन्हें सरोवर में नहलाकर शीतल किया था। दूसरा मत है कि गणपति जी के शरीर का तापमान न बढ़े इसलिए वेद व्यास ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया। लेप सूखने से गणेश जी का शरीर अकड़ गया, माटी झरने लगी। तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा। इस बीच श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए गए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा स्थापना और विसर्जन किया जाता है।