मैदान में उछल कूद और कटी पतंग को लपकने की चाहत में होने वाली भागदौड़ बच्चों की हड्डियों को भी मजबूत करती थी। महिलाएं घरेलू कामकाज के जरिये व्यायाम कर लिया करती थीं, लेकिन अब आरामदायक एसी कमरे, वीडियो गेम और टीवी से चिपके रहने की आदत सेहत बिगाड़ रही है। आमतौर पर जिन चोटों के लगने पर कुछ देर में ही हम सरपट दौड़ने लगते थे। अब वही हड्डियों के टूटने का सबब बन रही हैं।
आईएमए हॉल में अपोलो अस्पताल के ऑर्थोपेडिक डॉ. राजू वैश्य ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में हड्डियों का टूटना ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) बीमारी की दस्तक है। बेहद घातक इस बीमारी का पता हड्डी टूटने के बाद ही चलता है। उन्होंने कहा कि लोगों में कैल्शियम की कमी बड़ी समस्या बन चुकी है। हड्डियां प्रोटीन, कोलेजन और कैल्शियम के मिश्रण से बनती है। 30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं की हड्डियों में इस मिश्रण की सघनता कम होती जाती है। जिससे मामूली चोट भी हड्डियों के टूटने का सबब बन जाती है। गर्भावस्था में संतुलित आहार नहीं मिलने से नवजात में यह बीमारी होने के आशंका बढ़ जाती हैं।
खानपान और व्यायाम से बोन बैंक मजबूत करें
डॉ. वैश्य ने कहा कि जिन नवजातों में बोन बैंक (हड्डी में कैल्शियम और प्रोटीन) की कमी हो जाती है, उनकी हड्डियां जल्दी खराब होने लगती हैं। व्यायाम और खेलकूद से हड्डियों का विकास और मजबूती आती है। युवा अवस्था में बोन बैंक मजबूत होने के बाद 70 साल तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
बीमारी के संकेत
40 साल के बाद महिला और 50 साल के बाद पुरूषों में इसकी अधिक संभावना रहती है। ऐसे में हर साल बोन डेन्सिटी टेस्ट करनी चाहिए।
हड्डियों के कमजोर होने पर क्या करें
- संतुलित खानपान और मेडिसिन से ठीक होने की संभावना।
- विटामिन डी और कैल्शियम की नियमित डोज लें
- वजन नियंत्रित रखें।
गठिया से बचने को खाये हल्दी, अदरक और औषधीय नमक
रिसर्च में सामने आया है कि हल्दी, अदरक, बोसवेलिया (शल्लकी) पेड़ की जड़ से भी बीमारी को दूर रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, औषधीय नमक अल्फापिन और कोलेजन पेप्टाइट, ग्लूकोसामिन (ग्लूकोज) की नियमित डोज भी फायदेमंद होती है। इसेे न्यूट्रासिटिकल थेरेपी कहा जाता है।