पिछले साल एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मेजबानी में हुई नॉर्थ जोन हॉकी गर्ल्स प्रतियोगिता इस बार विश्वविद्यालय के हाथ से खिसक गई। पिछले साल हॉकी प्रतियोगिता एस्ट्रोटर्फ के बजाय घास वाले ऊबड़-खाबड़ मैदान पर कराना इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय के खेल विभाग का कहना है कि हॉकी अभी किसी को आवंटित नहीं हुई है, इसलिए उम्मीद है कि विश्वविद्यालय को ही यह प्रतियोगिता मिल जाएगी।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) ने नार्थ जोन और आल इंडिया का खेल कैलेंडर जारी कर दिया है। इस बार विश्वविद्यालय को टेबल टेनिस की नार्थ जोन और सेपक टाकरा की आल इंडिया प्रतियोगिता की मेजबानी मिली है। सेपक टाकरा में देश भर के विश्वविद्यालय हिस्सा लेंगे। पिछले साल विश्वविद्यालय को टीटी के साथ ही गर्ल्स नार्थ जोन हॉकी की भी मेजबानी मिली थी। प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब समेत कई प्रदेश के करीब 20 विश्वविद्यालयों की टीमों ने हिस्सा लिया था, लेकिन प्रतियोगिता एस्ट्रोटर्फ पर नहीं हो सकी थी। सभी मैच विश्वविद्यालय और बरेली कॉलेज के गड्ढे युक्त ग्राउंड पर कराए गए थे। हरियाणा और पंजाब की टीमों ने मैदान को लेकर आपत्ति भी जताई थी। पर्यवेक्षक के तौर पर आए द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित हॉकी की नेशनल टीम के कोच रहे सरदार बलदेव सिंह ने भी मैदान पर सवाल उठाए थे। कहा था कि विदेशों की तरह हॉकी की टीमें तैयार करनी हैं तो घास के मैदान से निकालकर हॉकी को एस्ट्रोटर्फ पर लाना ही होगा। सूत्रों की मानें तो प्रतियोगिता के बाद एआईयू पर्यवेक्षक से ही फीडबैक लेता है इसके बाद अगले साल की प्रतियोगिताओं का आवंटन होता है। विश्वविद्यालय के मैदानों की रिपोर्ट अच्छी नहीं गई थी, लिहाजा इस बार हॉकी की मेजबानी विश्वविद्यालय को नहीं मिल सकी। हालांकि दो बड़ी प्रतियोगिताएं विश्वविद्यालय के खाते में आईं हैं।
चार खेलों की मांगी थी मेजबानी
विश्वविद्यालय ने एआईयू से हॉकी, टीटी, कुश्ती और सेपक टाकरा की मेजबानी मांगी थी। हॉकी और कुश्ती की मेजबानी विश्वविद्यालय को नहीं मिल सकी।