जानलेवा हमले के दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने चार लोगों को शुक्रवार को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई। इनमें से एक आरोपी 70 साल का शख्स है।
पहली घटना करीब पांच साल पुरानी है। आंवला के गांव गणेशपुर की मालो देवी ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उनके पति खुशाली राम और रामपाल के बीच घर के आगे से निकलने वाले रास्ते को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते रामपाल ने 12 नवंबर 2013 की रात को घर में घुसकर उसके पति खुशाली राम को तमंचे से गोली मार दी। शोरशराबा सुनकर लोग इकट्ठे हुए तो वह भाग गया। विशेष न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने रामपाल को दोषी मानते हुए उस पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दूसरा मामला भमोरा के गांव सिरोही का है। गांव के सलामत हुसैन ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भाई नत्थू बख्श 12 दिसंबर 2000 को सुबह आठ बजे उनके घर से आ रहा था। पुरानी रंजिश के चलते रास्ते में गांव के ही मुश्ताक, अजीज, लियाकत और छोटे ने उसके साथ गालीगलौज की और मुश्ताक ने फावड़े से उसकी गर्दन पर वार कर दिया। शोर सुनकर लोग इकट्ठे हुए तो धमकी देते हुए हमलावर भाग गए। अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खां ने छोटे, मुश्ताक व लियाकत को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई और तीनों पर 36-36 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।