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आईपीसीएल के महाप्रबंधक पर एफआईआर

Mon, 04 Jun 2018 01:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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बरेली।
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विधायकों की निधि में घोटाला करने वाली इंडियन प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (आईपीसीएल) के महाप्रबंधक प्रदीप गोयल के खिलाफ शनिवार को बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। सीडीओ के आदेश इस पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के सहायक अभियंता एमएम अग्रवाल ने एफआईआर लिखाई है। इस कार्रवाई से कंपनी में शामिल कई विधायकों के चहेतों के अलावा अफसरों और बाबुओं की नींद उड़ गई है। जीएम पर विधायकों की निधि का 46.179 लाख रुपया लेकर भाग जाने का आरोप है।
आईपीसीएल ने वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच विधायक निधि की करोड़ों की रकम जारी हुई लेकिन कंपनी के कारिंदों ने इसमें फर्जीवाड़ा करते हुए खूब घोटाले किए। इस कंपनी को छह सभी विधानसभा क्षेत्रों में 94 काम कराने के लिए 246.817 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने जुलाई 2017 में विधायकों के निधि में हुए घोटालों का पर्दाफाश करने के लिए जांच बैठा दी लेकिन डीडीओ रामरक्षपाल यादव की अध्यक्षता में बनी इस समिति ने जांच की ही नहीं। इससे इस घोटाले की फाइल फिर दब गई। सीडीओ ने इस मामले में फिर से तेजी दिखाई अक्टूबर 2017 में तीन समितियां गठित कर इस घोटाले की नए सिरे से जांच शुरू करा दी। इसमें शामिल लोनिवि प्रांतीय खंड, निर्माण खंड और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंताओं ने जांच पूरी की। इसमें यह सामने आया कि आईपीसीएल ने विधायकों के 94 में से 20 प्रोजेक्ट तो शुरू ही नहीं किए थे। कार्यदायी संस्था ने इन कामों को न तो शुरू कराया और न ही अधूरे कामों को पूरा कराने में गंभीरता दिखाई। इस सभी कामों को छोड़कर आईपीसीएल के महाप्रबंधक प्रदीप गोयल विधायक निधि का 46.179 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। विधायक निधि के घोटाले को लेकर सीडीओ के आदेश पर रिपोर्ट बारादरी थाने में शनिवार को दर्ज हो गई है।
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फर्जी निकली मुहर, कंपनी का दफ्तर भी गायब
विधायक निधि का करोड़ों का काम कराने वाली आईपीसीएल से पत्राचार करने के लिए संस्था के कार्यालय उत्सव पार्ट, महानगर, बरेली में पत्राचार किया जाता रहा। सीडीओ ने बताया कि कंपनी की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं आया। इसके अलावा सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन में संस्था की मुहर और संस्था की बैलेस सीट पर लगाई गई मुहर में भी समानता नहीं मिली है।
 
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