तिलहर (शाहजहांपुर)। ‘अल्लाह ताला का लाख लाख शुक्र है कि उसने जान बख्श दी, भयावह मंजर आंखों से आज भी भुलाए नहीं भूलता, आंखें बंद करूं या खोलूं बस उसी वीभत्स दुर्घटना का चित्र सामने नजर आता है।’ बरेली में बस अग्निकांड में गोंडा डिपो की बस में यात्रा कर रहे तिलहर का तहसीम घटना के दो दिन बाद भी डरा सहमा हुआ है। उसने बताया कि बस में आग लगने के बाद उसने खिड़की का शीशी तोड़कर अपनी जान बचाई।
नगर के मोहल्ला मौजमपुर निवासी मोहम्मद सलीम घड़ीसाज का 21 वर्षीय पुत्र तहसीम बरेली में बटलर प्लाजा मार्केट में एक दुकान पर कंप्यूटर लैपटॉप रिपेयर का कार्य करता है। वह तिलहर से बरेली रोजाना आता जाता है। 5 जून को भी वह उसी गोंडा डिपो की बस में सवार था जो बरेली में आग का गोला बन गई थी और उसमें सवार 25 लोगाें की मौत हो गई थी। वह टिकट लेकर तिलहर आ रहा था तहसीम ने जो कुछ बताया रोंगटे खड़ा करने वाला दृश्य था। तहसीम बताता है कि बस बहुत तेज गति में नहीं थी सामने तेज गति से आ रहे ट्रक ने बस में आमने सामने टक्कर मार दी। वह बस की सबसे पिछली सीट पर बैठा था तेज आवाज होने के साथ ही बस की तेल टंकी फ ट गई और बस में आग लग गई। बस में आग लगने के बाद इतना खौफ नाक मंजर था कि रूह कांप गई। महिलाएं बच्चे सभी चीखने चिल्लाने लगे। बस में केवल अकेला अगला दरवाजा था अगले हिस्से में ही आग लगनी शुरू हुई। एक दरवाजा होने के कारण बमुश्किल कुछ लोग कूद फ ांदकर कर निकल पाए। मौत उसके सामने खड़ी थी ऐसे में साथी यात्री के साथ मिलकर बस की खिड़की का शीशा तोड़ डाला। शीशे से बाहर कूदकर उन दोनों ने अपनी जान बचाई। बाहर कूदने के बाद इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाया कि बस के पास से किसी को निकाल सके। दूसरा साथी किसी और दिशा को भाग गया वह भी भयभीत होकर सड़क पर भागे जा रहा था, जैसे-तैसे तहसीम तिलहर आ पाया। आज भी उस मंजर को याद कर रूह कांप जाती है। फिर भी अल्लाह का शुक्र है उसने जान बख्श दी।