सीओ सिटी प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि बैंक अधिकारियों ने गड़बड़ी पकड़कर जो नाम दिए, उनके खिलाफ नामजद रिपोर्ट कराई गई है। अब पुलिस की विवेचना में अगर कुछ और आरोपियों के नाम सामने आए तो उन्हें भी शामिल किया जाएगा।
ऋण की रकम के बंदरबांट में शामिल थे बैंक अफसर और एजेंसी वाले
एचडीएफसी बैंक शाखा से 12 लोगों को साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा का होम लोन कराने में तत्कालीन बैंक अधिकारियों से लेकर सत्यापन करने वाली एजेंसियों के जिम्मेदार शामिल थे। यही वजह रही जो फर्जी कागजातों का सत्यापन आंख मूंदकर कर दिया गया। विभागीय ऑडिट में पांच साल बाद हकीकत पूरी तरह सामने आई तो एफआईआर दर्ज कराई गई।
बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत सिंह के अनुसार बैंक के बिक्री कार्यकारी कुमार चेतन ने सभी 12 ऋण धारकों के लिए ऋण प्रक्रिया पूरी की थी। विभिन्न सत्यापन एजेंसियों के कर्मचारियों ने भी इन ऋण धारकों के घर और कार्यालयों का सत्यापन किया। आरोप है कि इन सत्यापनकर्ताओं ने तथ्यों के विपरीत जाकर सकारात्मक रिपोर्ट दी। सभी को उन्हीं पता पर रहता हुआ बताया गया। यह भी दावा किया गया कि लोन की ब्याज समेत अदायगी करने में यह सभी सक्षम हैं।
ऋण स्वीकृत कराने के लिए बैंक विवरण, पेंशन विवरण और आय प्रमाण पत्र व इनमें से कुछ की वेतन पर्ची जैसे दस्तावेज भी कूटरचित बनाकर प्रस्तुत किए गए। इन दस्तावेज में दिए गए पते बाद में की गई जांच में गलत पाए गए। बैंक प्रबंधन की जांच में पता चला कि कोई भी व्यक्ति उन पतों पर नहीं रहता था। आसपास के लोगों ने भी इन नामों के व्यक्तियों के वहां न रहने की पुष्टि की।
इन ऋणधारकों के खिलाफ लिखी रिपोर्ट
सीओ सिटी प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि ऋणधारक ऐमन जैदी, अजय कुमार, अमित कुमार, करिश्मा, लक्ष्मी देवी, आशीष, प्रवेश कुमार, रेखा, प्रीति, संजय कुमार, सरोज, सुमित और जिम्मेदार सेल्स एग्जीक्यूटिव चेतन कुमार, सत्यापन करने वाली एजेंसी आईपी सिंह एंड एसोसिएट्स, दूसरी एजेंसी एस्ट्यूट, तीसरी एजेंसी संजय भार्गव, सत्यापनकर्ता कर्मचारी आईपी सिंह एंड एसोसिएट्स एजेंसी, सत्यापनकर्ता कर्मचारी रफीक अहीम, सत्यापनकर्ता कर्मचारी सूरजपाल, सत्यापनकर्ता कर्मचारी सोहेलराम और सत्यापनकर्ता कर्मचारी दीपक कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।