बरेली। बकरीद के मौके पर बकरों की बिक्री में एक नया चलन देखने को मिल रहा है। अब बकरे देखकर नहीं, बल्कि वजन के हिसाब से बेचे जा रहे हैं। बकरों के दाम साढ़े पांच सौ से छह सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक लगाए जा रहे हैं।
यह चलन राजस्थान के कोटा, जयपुर और चोमू जैसे शहरों में कई वर्षों से मौजूद है। आमतौर पर बकरों की खरीदारी सीधे जानवर देखकर की जाती थी, लेकिन अब यह तरीका बदल रहा है। अब यह वजन के हिसाब से बिक्री का तरीका बरेली शहर में भी अपनाया जा रहा है। इससे पहले कुछ गांवों में यह कारोबार हुआ था, लेकिन शहरों में यह पहली बार बड़े पैमाने पर दिख रहा है।
कुछ लोगों ने बकरों के फार्म बनाए हैं, जहां वे साल भर बकरों को पालते हैं। इसके बाद वे इन बकरों को बाजार में या अपने फार्म पर ही ग्राहकों को बेचते हैं। इन बकरों की कीमत आमतौर पर 15 हजार से 60 हजार रुपये तक पड़ रही है। मोती मस्जिद के हाफिज चांद खान ने इस बिक्री को शरई तौर पर जायज बताया है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई धार्मिक अड़चन नहीं है। वजन के हिसाब से बकरे की खरीदारी और बिक्री की जा सकती है। उन्होंने बताया कि एक बकरे पर एक ही व्यक्ति के नाम की कुर्बानी हो सकती है। वहीं, एक पड्डे में सात लोग हिस्सा ले सकते हैं। पड्डे में सभी को बराबर का हिस्सा बांटा जाता है।
हाफिज चांद खान ने इस बात के लिए सावधान किया है कि बहुत सारे लोग बिना मीट दिए पत्ती डाल रहे हैं और कीमत इतनी कम ले रहे हैं कि इसमें उस कीमत में आज के एतबार से सात हिस्सों के पैसों में जानवर नही मिल सकता है। इसलिए ऐसे लोगों से होशियार रहे।