बरेली। पुराना शहर बालजती की गूलर वाली मस्जिद में तरावीह पढ़ाने को लेकर हाफिजों का विवाद हो गया था। पहली तरावीह को उठा विवाद दूसरे रोज इस बात पर निपटा शांत हुआ कि दोनो ही हाफिजों को नजराना दिया जाएगा।
इस मस्जिद में पिछले लगभग 28 सालों से हाफिज शेर खां तरावीह पढ़ाते आ रहे थे। मस्जिद प्रबंधन ने पुराने हाफिज की उम्र को देखते हुए इस बार नए हाफिज मोहम्मद शाहिद रजा को कुरान सुनाने के लिए रखा लिया। जब उन्होंने तरावीह में कुरान सुनाना शुरू किया तो वहां मौजूद पुराने हाफिज शेर खां ने बार बार बीच में लुकमा (टोकना) देना शुरू कर दिया। इसे लेकर कुछ लोगों ने एतराज जताया। इसमें बात बिगड़ गई और नौबत यहां तक आ गई कि इस मुद्दे पर नमाजी दो धड़ों में बंद गए। तब यहां के मुतवल्ली डा. एसयू चिश्ती ने मामले को रफा दफा करने के लिए सुझाव रखा की वह दोनों ही हाफिजों को नजारा देंगे। इस बात पर सभी की सहमति बन गई और मामला शांत हो गया। तब से अब यहां रविवार को तरावीह में कुरान मुकम्मल हुआ। इस मौके पर यहां हुए जलसे में पुराने हाफिज शेर खां को भी आमंत्रित गया। अलबत्ता वह जलसे में नहीं पहुंचे।