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अपनी जरूरतों के लिए कुदरत के बेशकीमती तोहफों को कुर्बान न करो...

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बरेली। विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर ‘अमर उजाला’ और बीएल एग्रो के सहयोग से सोमवार को परसाखेड़ा स्थित बीएल एग्रो के सभागार में हुई विचार गोष्ठी में वक्ताओं और विशेषज्ञों ने वर्तमान हालातों पर चिंता जाहिर की तो भविष्य के खतरों को लेकर आगाह भी किया। विशेषज्ञ बोले कि अगर अभी नहीं चेते तो 2070 तक न पीने को पानी होगा और न ही खाना। संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण न किया तो कुदरत के बेशकीमती तोहफा हम खो देंगे।
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कार्यक्रम का संचालन व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता ने किया। वक्ताओं ने ‘अमर उजाला’ की पहल को सराहा। बोले कि जो काम शिक्षण संस्थानों को करने थे वो ‘अमर उजाला’ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझकर निभा रहा है। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक खरे ने पॉवर प्वाइंट प्रेजिंटेशन के माध्यम से एक बच्चे की कहानी से बताया कि पृथ्वी है तो मानव है। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग में एमिरेटस प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना ने एक सेब के उदाहरण से बताया कि दुनिया के महज 25 फीसदी रहने लायक है। अगर एक बार यह बरबाद हो गई तो फिर कहीं रहने लायक जगह नहीं मिलेगी। जल निगम से सेवानिवृत्त इंजीनियर सुरजीत सिंह ने जल प्रदूषण पर चिंता जाहिर की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेयर डॉ. उमेश गौतम ने कहा कि बरेली को हरा भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने पर पूरा फोकस कर रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए बीएल एग्रो के एमडी घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि एक उद्यमी ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उद्यमी सुरेश सुंदरानी ने छोटे प्रयासों से प्रकृति की रक्षा करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान विशाल मेहरोत्रा, सतीश अग्रवाल, रजत शर्मा, अतुल कपूर, मनमोहन सब्बरवाल, संदीप टंडन आदि लोग मौजूद रहे। नॉलेज पार्टनर गलगोटिया यूनिवर्सिटी रहा।

एक्सपर्ट के बोल
पृथ्वी दिवस, ओजोन दिवस, पर्यावरण दिवस और न जाने कितने दिवस हर साल मनाते हैं, लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रदूषण का स्तर और धरती का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। अब जरूरत जन्मदिन की तरह ये दिन मनाने की नहीं है बल्कि हर इंसान को अपनी जिम्मेदारी निभाने की है। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन की जगह उनको बचाना भी होगा।
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- प्रोफेसर वीपी सिंह, सेवानिवृत्ति शिक्षक रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्लांट साइंस विभाग व विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति

पूरी पृथ्वी के क्षेत्रफल का 25 फीसदी हिस्सा ही रहने लायक है। उसमें भी 3-4 फीसदी हिस्से में ही हम रहते हैं। अगर इसी प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते है रहे तो पृथ्वी पर रहने लायक जगह तक नहीं बचेगी। कल बचाने के लिए हमें आज बचाना होगा। छोटे जीव जंतु की प्रजाति नष्ट होना खतरे की घंटी बजा चुका है। बरेली में ही प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है।
- डॉ. डीके सक्सेना, पर्यावरणविद व एमेरिटस प्रोफेसर बरेली कॉलेज बॉटनी विभाग

पृथ्वी का जीवन 6.5 लाख वर्ष का है जिसमें से 3.5 अरब वर्ष हो चुके हैं। 10 हजार वर्ष पहले ही हम सभ्य हुए और 2050 तक हमारी जनसंख्या नौ अरब होगी, लेकिन जिस गति से हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं तो वो दिन दूर नहीं जब पानी और खाने का संकट पैदा होंगे।
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- डॉ. आलोक खरे, एसोसिएट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष बॉटनी विभाग बरेली कॉलेेज
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