बरेली। नवरात्र के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की। सुबह से शाम तक मंदिरों में श्रद्धालुओं का उमड़ने का सिलसिला जारी रहा। दोपहर में मंदिरों की महिला मंडली ने माता के छंद और भजन गाकर मंदिर परिसर में मौजूद प्रत्येक को झूमने पर विवश कर दिया।
मां मनोकामना वैष्णो धाम देवी मंदिर में महिला मंडली ने ‘जिसने भी मां की चौखट पे सर को झुका लिया’, ‘मैया री जगदंबे मेरे मन में बसा तेरा प्यार’, ‘पवन उड़ाकर ले गई रे मेरी मां की चुनरिया’ आदि छंद गाकर मां की महिमा का गुणगान किया। वहीं साहूकारा स्थित नौ देवी मंदिर में कांति देवी, आशा गुप्ता, कविता, रामा आदि महिलाओं ने ‘मेरी मां अंबे दुर्गे भवानी किस जगह तेरा जलवा नहीं है’, ‘मां सिंह पे सवार है हाथों में तलवार है’, ‘जबसे मिली तू मां मेरी किस्मत बदल गई’ आदि भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। वहीं देर शाम हजियापुर स्थित देवी मंदिर में देर रात जगराता में भजनों से मुकाबला हुआ। वहीं श्रीहरे राम ग्वाल बाल सेवा समिति की महिला समिति ने सुभाषनगर स्थित नौ देवी मंदिर में भजन और छंद गाए गए।
यंत्र-मंत्र-तंत्र का सिद्ध स्थल है श्रीहरे राम नवदुर्गा मंदिर
बरेली। सुभाष नगर स्थित श्रीहरे राम नवदुर्गा सिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूरी करता है। बताते हैं कि बच्चों को संस्कारवान बनाने के उद्देश्य से मंदिर की नींव पड़ी, लेकिन अब यह सिद्ध मंदिर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
मंदिर के पुजारी मुकेश ने बताया कि वर्ष 1979 में मंदिर के संस्थापक योगेंद्र नाथ ग्रोवर नाती को साथ लेकर बाबा सुखदेव चंद शर्मा के पास गए थे, जिनसे प्रेरित होकर मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया गया। धार्मिक सभाओं ने मंदिर निर्माण में भागेदारी की। दान में जमीन मिली, लेकिन यहां गहरे गड्ढे होने से निर्माण कार्य में बाधा आड़े आई। बाद में गड्ढों को पाटकर वर्ष 2004 के शारदीय नवरात्रों में भवन का शिलान्यास हुआ। बताते हैं कि निर्माण के दौरान तमाम अड़चनें आईं, लेकिन भगवती बगलामुखी की कृपा से वर्ष 2005 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।
निर्माण पूरा होने के बाद देव प्रतिमा की स्थापना का संकट आया, जिसके लिए श्रद्धालुओं ने आर्थिक मदद की। 30 जनवरी 2006 को मंदिर में 51 देव प्रतिमाओं की स्थापना हुई। साथ ही मंदिर में माता वैष्णो देवी की गुफा बनाकर उसमें त्रि-देवियों की पिंडियां स्थापित हुईं। अब गुफा में मां भगवती की 21 प्रतिमाएं स्थापित हैं।
मुराद पूरी होने पर चढ़ाते हैं झंडे
जितेंद्र शर्मा ने बताया कि श्रद्धालु दूर-दराज से यंत्र-मंत्र-तंत्र के लिए यहां पहुंचते हैं और मुराद पूरी होने पर झंडे अर्पित करते हैं। बताया कि मंदिर में वर्तमान में भगवती नवदुर्गा स्वरूप, मां काली, मां बगलामुखी, मां अन्नपूर्णा, शीतला, गायत्री, सन्तोषी, अर्धनारीश्वर, हर-हरेश्वर, लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती, काल भैरव व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित है। शारदीय, चैत्रीय नवरात्र समारोह, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, हनुमान जयन्ती, शनि जयंती, माता बगलामुखी जयंती, सरस्वती पूजा और काली पूजा समेत शिवरात्रि व रामनवमी पर धार्मिक समारोह होते हैं।