अबकी बार 24 अक्तूबर को अमृत रस बरसाने वाली शरद पूर्णिमा पड़ रही है।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण को निकलती हैं। इसलिए इस पर्व को ‘कोजागिरी’ पूर्णिमा भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रीविष्णु का विधि विधान से पूजन और व्रत का अनुष्ठान करने से मां घर में सुख समृद्धि का वर देती हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस दिन चंद्रमा पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होगा। बताया कि पूर्णिमा का मान 23 अक्तूबर की रात 10.36 बजे से शुरू होकर 24 अक्तूबर की रात 10.12 बजे तक रहेगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी शरद पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसलिए इस पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण की रास पूर्णिमा भी कहते हैं। बताया कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अनंत मंगल दायक व कल्याणकारी होता है। इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण प्रभाव में होता है। कहा कि जो जातक चंद्र ग्रहण दोष से पीड़ित हैं, कुंडली में चंद्रमा नीच राशि का हो या चंद्रमा की महादशा, अंतर्दशा चल रही हो तो उन्हें व्रत व पूजन करने से इससे काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।
वैज्ञानिक महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती के बहुत ही नजदीक आ जाता है। चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे पृथ्वी पर गिरते हैं। ऐसे में खाने की कोई चीज ‘खीर’ रखने से उसमें सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं। जो हमारी सेहत के लिए बहुत ही अनुकूल होते हैं। मान्यता है खाने की प्रत्येक चीज चंद्रमा की रोशनी में रखी जा सकती है, लेकिन सफेद रंग चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में खीर को शुद्ध सात्विकता से जोड़कर देखते हुए खीर को ही चंद्रमा की रोशनी में रखने का विधान है।